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Wheat Cultivation: गेहूं की अगेती खेती करने पर बंपर पैदावार देती हैं ये किस्में, पंजाब-हरियाणा में खूब होती है बुवाई

ABP Live   |  24 Sep 2022 02:38 PM (IST)
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Wheat Cultivation: गेहूं एक ऐसी खाद्यान्न फसल है, जिससे भारत के साथ-साथ दुनियाभर में खाद्य आपूर्ति होती है. भारत को गेहूं का एक बड़ा उत्पादक देश कहा जाता है. यहां गेहूं की खेती के साथ-साथ गेहूं का निर्यात भी किया जाता है. यही कारण है कि इसका उत्पादन बढ़ाने के लिये किसानों को अगेती खेती करने की सलाह दी जाती है. कई रिसर्च में सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन के दुषपरिणामों से बचने के लिये गेहूं की खेती एक मददगार विकल्प साबित हो सकता है. कई किसान सिंतबर के अंत तक गेहूं की अगेती खेती के काम शुरू कर ही देते हैं. इस बीच अच्छी गुणवत्ता वाली उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिये, जिससे गेहूं की अधिक पैदावार ले सकें.

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तीन चरणों में करें गेहूं की खेती- कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक गेहूं की खेती तीन चरणों में की जाती है, जिसमें अगेती खेती, मध्यम खेती और पछेती खेती शामिल है. गेहूं की खेती का पहला चरण 25 अक्टूबर से 10 नवंबर तक होता है. दूसरी चरण 11 नवंबर से 25 नवंबर तक और तीसरा चरण 26 नवंबर से 25 दिसंबर तक रहता है. किसान चाहें तो सिंतबर के अंत से शुरू करके 25 अक्टूबर तक गेहूं की अगेती किस्मों की बुवाई कर सकते हैं. बाजार से गेहूं के प्रमाणित बीज ही खरीदने चाहिये.

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डब्ल्यूएच 1105 (WH 1105) गेहूं की अगेती बुवाई के लिये सबसे लोकप्रिय किस्म डब्ल्यूएच 1105 से बुवाई के 157 दिनों के अंदर 20 से 24 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार ले सकते हैं. गेहूं की इस किस्म का पौधा भी सिर्फ 97 सेमी लंबाई का होता है और कम लंबा होने के कारण इस किस्म में आंधी और तेज हवाओं के कारण नुकसान की संभावना भी कम ही रहती है. डब्ल्यूएच 1105 (WH 1105) किस्म भी पीला रतुआ रोग के खिलाफ ढाल का काम करती है. हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेष, मध्य प्रदेश और बिहार के किसान भी ज्यादातर डब्ल्यूएच 1105 किस्म के बीजों से ही बुवाई करते हैं.

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एचडी 2967 (HD 2967) भारत में गेहूं की अगेती खेती के लिये एचडी 2967 (HD 2967) का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है. बता दें कि ये गेहूं की रोगरोधी प्रजाति है, जिसमें पीला रतुआ रोग की संभावनायें कम ही रहती हैं. गेहूं की ये किस्म 150 दिनों के अंदर पककर तैयार हो जाती है, जिससे प्रति एकड़ में 22 से 23 क्विंटल तकत पैदावार ले सकते हैं. HD 2967 किस्म के गेहूं के पौधे विपरीत परिस्थितियों में भी तेजी बढ़ते है करीब 101 सेमी तक की लंबाई हासिल कर लेते हैं. यही कारण है कि इस गेहूं की कटाई के बाद भूसा भी अधिक निकलता है. यह किस्म पंजाब और हरियाणा की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से सबसे उपयुक्त रहती है.

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पीबीडब्ल्यू 550 (PBW 550) गेहूं की नवीनतम विकसित पीबीडब्ल्यू 550 प्रजाति भी रोगरोधी है, जिससे खेती करने पर गेहूं की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों की संभावनायें कम ही रहती है. एक अनुमान के मुताबिक पीबीडब्ल्यू 550 किस्म बुवाई के 145 दिनों के अंदर पककर कटाई के लिये तैयार हो जाती है. इस किस्म से बुवाई करने पर प्रति एकड़ कृके हिसाब से 22 से 23 क्विंटल तक खाद्यान्न उत्पादन ले सकते हैं.

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एचडी 3086 (HD 3086) एचडी 3086 किस्म भी गेहूं की उन्नत किस्मों में शुमार है, जिसकी खेती करने पर रोगों को साथ-सात मौसम की अनिश्चितताओं के कारण होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है. बता दें कि इस किस्म से बुवाई करने पर फसलें गर्म हवाओं से सुरक्षित और गेहूं की बालियां भी रोगमुक्त रहती है. इस किस्म के बीजों से 156 दिनों के बाद करीब 23 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन ले सकते हैं. इसकी बुवाई के लिये करीब 55 से 60 किलों प्रति एकड़ के हिसाब से बीज लगते हैं, जो पीला रतुआ के खिलाफ कवच का कम करते हैं. हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों के किसान इस किस्म से खेती करके कम खर्च में बेहतर उत्पादन ले सकते हैं.

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