बेल ट्रैक्टर छोड़ो, अब अपनाओ ड्रोन फार्मिग, जानिए कैसे स्मार्ट बन रहा आज का किसान

खेती-किसानी के पारंपरिक तौर-तरीकों में अब एक बहुत बड़ा और शानदार बदलाव देखने को मिल रहा है. वह जमाना अब पीछे छूट रहा है जब किसान खेतों में बेल या भारी-भरकम ट्रैक्टरों के सहारे दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत किया करते थे. आज का आधुनिक किसान नई तकनीक को अपनाकर बेहद स्मार्ट और हाई-टेक बनता जा रहा है.
अब खेती में सिर्फ बेल और ट्रैक्टर का ही काम नहीं रहा है. बल्कि आजकल के किसान फसलों की सुरक्षा और बेहतर पैदावार के लिए ड्रोन फार्मिंग को तेजी से गले लगा रहे हैं. यह एडवांस गैजेट खेती के मुश्किल कामों को चुटकियों में निपटा देता है.
खेतों में कीटनाशकों और लिक्विड खादों का छिड़काव करना हमेशा से एक थका देने वाला और जोखिम भरा काम रहा है. पुराने तरीकों से छिड़काव करने में जहां कई दिनों का लंबा समय बर्बाद होता था वहीं अब ड्रोन की मदद से महज कुछ ही घंटों के भीतर पूरे खेत में छिड़काव पूरा हो जाता है.
ड्रोन में लगे हाई-टेक जीपीएस, स्मार्ट सेंसर्स और ऑटोमेटेड नेविगेशन सिस्टम की वजह से खेतों में पेस्टिसाइड की एक-एक बूंद का बिल्कुल सटीक छिड़काव होता है. इस मॉडर्न तकनीक की बदौलत रसायनों की बर्बादी लगभग शून्य हो जाती है और दवाओं की कुल खपत में 20 प्रतिशत तक की बड़ी बचत होती है.
मैनुअल तरीके से पीठ पर स्प्रे पंप टांगकर छिड़काव करने से किसानों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता था. जहरीले केमिकल के सीधे संपर्क में आने से कई बीमारियां होने का खतरा रहता था. मगर अब ड्रोन को दूर बैठकर सुरक्षित दूरी से आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे सेहत का रिस्क खत्म हो गया है.
यह जादुई उड़ने वाला गैजेट सिर्फ छिड़काव ही नहीं करता. बल्कि इसमें लगे एडवांस कैमरे और इंफ्रारेड मैपिंग सिस्टम फसलों की सेहत पर बारीक नजर रखते हैं. किसान भाई घर बैठे ही यह जान सकते हैं कि खेत के किस हिस्से में बीमारी लगी है या कहां पर पानी की कमी है.
बदलते वक्त के साथ सरकार भी इस आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ड्रोन खरीदने पर भारी सब्सिडी दे रही है. कम लागत समय की बचत और बंपर मुनाफे के दम पर ड्रोन फार्मिंग आज के भारतीय किसानों को सच में स्मार्ट बना रही है.