IN PICS: उत्तर प्रदेश पुलिस की वजह से गई पांच साल की मासूम की जान!

इलाहाबाद में पांच साल की बच्ची की मौत के बाद शूक्रवार को जमकर कोहराम मचा. आरोप है कि कोई केस दर्ज हुए बिना ही एक भू माफिया के दबाव में इलाके की पुलिस बच्ची के मां-बाप को घर से लादकर थाने ले आई और बेवजह दिन भर उन्हें वहीं बिठाए रखा.
राधिका की मौत और उसके बाद हुए हंगामे पर इलाहाबाद के अफसरान चुप्पी साधे हुए हैं. वह मामले की जांच कराने के दावे तो कर रहे हैं लेकिन कैमरे पर कोई भी बयान देने से बच रहे हैं. अफसरान शायद ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें उनके मातहतों की गलती साफ़ तौर पर नजर आ रही है और उनके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है.
पिता सुधीर ने सीना पीट-पीटकर अफसरों से जब यह सवाल पूछा कि पुलिस आखिर उन्हें किस जुर्म में घर से पकड़कर ले गई थी तो वहां मौजूद पुलिस वालों के पास सिर झुकाने के अलावा कोई जवाब नहीं था. पड़ोसियों का भी साफ़ तौर पर कहना है कि बच्ची राधिका की मौत पुलिस की वजह से इलाज नही हो पाने के चलते हुई है.
सुधीर और सरोज बेटी की लाश को लेकर आज सुबह घर के नजदीक बेनीगंज तिराहे पर सड़क पर बैठ गए. उनके साथ पड़ोस के कुछ और लोगों ने आकर रास्ता जाम कर दिया. मौके पर पहुंची पुलिस ने लाठियों के जोर पर बाकी लोगों को तो भगा दिया, लेकिन बेटी को खो चुके मां – बाप दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक वहीं बैठे रहने की जिद पर अड़े रहे. बेटी की लाश को सीने से चिपकाकर इंसाफ की मांग करते हुए मां- बाप का साफ आरोप है कि राधिका की जान पुलिस की बेरहमी की वजह से गई है.
इलाहाबाद में पांच साल की मासूम बेटी की लाश को सड़क पर रखकर इंसाफ की फ़रियाद करते इस दंपत्ति ने इलाहाबाद पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बिटिया की मौत के लिए बेरहम खाकी वालों को ज़िम्मेदार ठहराया है. किराए पर बांस बल्ली सप्लाई करने का कारोंबार करने वाले शहर के बेनीगंज इलाके के सुधीर कुशवाहा का आरोप है कि उसकी एक ज़मीन पर इलाके के कुछ भू माफियाओं की नजर थी. भू माफिया उस पर ज़मीन बेचने का दबाव डालते थे. आरोप है कि सुधीर इसके लिए राजी नहीं हुआ तो भू माफियाओं ने पुलिस से सांठ-गांठ कर उस पर जबरन सुलह कराने की रणनीति बनाई.
इस दौरान उनकी बीमार बेटी घर पर तड़पती रही. मां-बाप रो-रोकर बीमार बेटी के इलाज की दुहाई देते रहे, लेकिन बेरहम पुलिस वालों का दिल नहीं पसीजा. पुलिस ने देर रात उसके पिता को तब छोड़ा जब बच्ची की मौत हो गई.
रात को बेटी राधिका ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया तो पड़ोसियों ने फिर से थाने पर खबर की. बेटी की मौत की जानकारी मिलने पर पुलिस ने कई सादे कागजों पर सुधीर से दस्तखत कराने के बाद उसे छोड़ा. सुधीर और सरोज को बेटी की मौत का यकीन नहीं हुआ तो वह एक से दूसरे अस्पताल का चक्कर काटते रहे. हालांकि हर जगह चेकअप के बाद उन्हें यही बताया गया कि उनकी लाडली अब इस दुनिया में नहीं रही.
दोपहर तीन बजे कई पड़ोसियों ने थाने पहुंचकर बेटी की हालत गंभीर होने की बात बताई तो घंटे भर बाद पुलिस ने सिर्फ उसकी मां सरोज को ही जाने की इजाजत दी. सरोज इन दिनों सात महीने की गर्भवती है, वह बच्ची को गोद में लेकर अस्पताल नहीं जा सकती थी. लिहाजा उसने पड़ोस की दूकान से दवा लेकर बेटी को खिलाई और पति को छुड़ाने के लिए फिर से थाने पहुंच गई. वहां उसने बिटिया की जिंदगी का वास्ता देकर पति को छोड़ने की फ़रियाद की, लेकिन वर्दी के नशे में मदहोश पुलिस वालों ने उसे गाली देकर भगा दिया.
करेली थाने की पुलिस कल सुबह नौ बजे सुधीर के घर पहुंची और सुधीर व उसकी गर्भवती पत्नी सरोज को जीप पर लादकर थाने उठा लाई. थाने में सुधीर को लाकअप में डाल दिया गया जबकि उसकी पत्नी सरोज को मुंशी के कमरे में बिठा दिया गया. इस बीच वायरल बुखार और डिहाइड्रेशन से पीड़ित उनकी पांच साल की बेटी राधिका घर पर अकेली ही पड़ी रही. पति – पत्नी थाने पर बेटी की बीमारी की दुहाई देते हुए खुद को छोड़े जाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी. ख़ास बात यह है कि सुधीर के खिलाफ पुलिस में कोई केस भी दर्ज नहीं था.
मां-बाप और पड़ोसियों ने शूक्रवार को सुबह पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बच्ची की लाश को सड़क पर रखकर देर तक हंगामा किया. दिल दहला देने वाले इस मामले पर अफसरान अब चुप्पी साधे हुए हैं.
इलाहाबाद में पांच साल की बच्ची की मौत के बाद शूक्रवार को जमकर कोहराम मचा. आरोप है कि कोई केस दर्ज हुए बिना ही एक भू माफिया के दबाव में इलाके की पुलिस बच्ची के मां-बाप को घर से लादकर थाने ले आई और बेवजह दिन भर उन्हें वहीं बिठाए रखा.