World Defence Budget 2026: वो 10 देश, जो सेना पर पानी की तरह बहाते हैं पैसा, भारत किस नंबर पर? कितना करता है खर्च
World Defence Budget 2026: दुनिया में बढ़ते तनाव के कारण रक्षा बजट देशों की प्राथमिकता बन गया है. आने वाले समय में कई देश अपनी सैन्य ताकत और तकनीक पर और ज्यादा खर्च कर सकते हैं.

दुनियाभर में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच हर देश अपनी सैन्य ताकत को लगातार मजबूत करने में लगा है. कई देश अपनी आर्थिक क्षमता के मुकाबले रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी कर रहे हैं तो कुछ देश कर्ज लेकर भी रक्षा जरूरतों को पूरा करने में जुटे हैं. कई शक्तिशाली देश अत्याधुनिक हथियारों के विकास, सैन्य आधुनिकीकरण और नई तकनीकों पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं. आइए जानते हैं दुनिया के सबसे अधिक रक्षा बजट वाले शीर्ष 10 देश कौन से हैं.
ग्लोबल फायर इडेंक्स 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले स्थान पर अमेरिका है. अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 831.5 बिलियन डॉलर है, जबकि डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के लिए 849.9 अरब डॉलर को मंजूरी दी गई है. यह बजट सैन्य आधुनिकीकरण, एयर डॉमिनेंस, नौसेना क्षमताओं के विस्तार और सैनिकों के सैलरी में खर्च किया जा रहा है. वैश्विक सैन्य उपस्थिति के कारण अमेरिका का रक्षा बजट दुनिया में सबसे बड़ा है.
चीन
दूसरे स्थान पर चीन है, जिसका रक्षा बजट करीब 303 बिलियन डॉलर है. चीन ने अपने बजट में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि की है. इसका बड़ा हिस्सा सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना विस्तार और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने में लगाया जा रहा है. अमेरिका और क्षेत्रीय देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन लगातार अपने रक्षा खर्च को बढ़ा रहा है.
रूस
तीसरे स्थान पर रूस है. रूस का रक्षा बजट लगभग 212.64 बिलियन डॉलर आंका गया है. रूस रक्षा खर्च से जुड़ी जानकारी सीमित रूप से सार्वजनिक करता है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि उसने अपने बजट में लगभग 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूस का सैन्य खर्च और भी चर्चा में रहा है.
जर्मनी
चौथे स्थान पर जर्मनी है, जिसका रक्षा बजट करीब 127.4 बिलियन डॉलर है. जर्मनी 2025 तक अपने रक्षा ढांचे को तेजी से आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है. उसका लक्ष्य नाटो के जीडीपी के 2 प्रतिशत रक्षा खर्च के मानक को पूरा करना और अपनी सशस्त्र सेनाओं की संचालन क्षमता बढ़ाना है.
भारत
पांचवें स्थान पर भारत है. भारत का रक्षा बजट लगभग 109 बिलियन डॉलर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.53 प्रतिशत अधिक है. यह कुल केंद्रीय बजट का लगभग 13.45 प्रतिशत हिस्सा है. भारत अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियारों की खरीद और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर खर्च कर रहा है.
यूनाइटेड किंगडम
छठे स्थान पर यूनाइटेड किंगडम है, जिसका रक्षा बजट लगभग 88.53 बिलियन डॉलर है, जो उसकी जीडीपी का करीब 2.26 प्रतिशत है. यूरोप में बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए ब्रिटेन अपनी सैन्य ताकत में लगातार वृद्धि कर रहा है और 2035 तक रक्षा बजट को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक ले जाने की योजना पर काम कर रहा है.
फ्रांस
सातवें स्थान पर फ्रांस है, जिसका रक्षा बजट लगभग 67.23 बिलियन डॉलर है, जो उसकी जीडीपी का 2.02 प्रतिशत है. फ्रांस यूरोप में बढ़ते सुरक्षा खतरों को देखते हुए एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोतों के निर्माण सहित कई बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है.
सऊदी अरब
आठवें स्थान पर सऊदी अरब है, जिसका रक्षा बजट लगभग 63.99 बिलियन डॉलर है. सऊदी अरब अपने सैन्य आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है. उसका लक्ष्य 2030 तक रक्षा खर्च का 50 प्रतिशत से अधिक स्थानीयकरण करना है, जिसके तहत एयरोस्पेस, बख्तरबंद वाहन और ड्रोन तकनीक में घरेलू क्षमता विकसित की जा रही है.
जापान
नौवें स्थान पर जापान है, जिसका रक्षा बजट लगभग 58 बिलियन डॉलर है. चीन, उत्तर कोरिया और रूस से जुड़े सुरक्षा चिंताओं के चलते जापान ने हाल के वर्षों में अपने रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि की है. वह मिसाइल डिफेंस और समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहा है.
ऑस्ट्रेलिया
दसवें स्थान पर ऑस्ट्रेलिया है, जिसका रक्षा बजट लगभग 57.35 बिलियन डॉलरहै. साउथ चाइना सी में चीन से लगातार खतरे को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से उन्नत कर रहा है. वह ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मिसाइल तकनीक पर विशेष निवेश कर रहा है. कुल मिलाकर, वैश्विक अस्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों ने रक्षा बजट को देशों की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर ला दिया है. आने वाले वर्षों में सैन्य आधुनिकीकरण और तकनीकी निवेश के कारण इन बजटों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है.
Source: IOCL

























