Who was Pope Francis: ईसाई समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का आज (21 अप्रैल) को 88 साल की उम्र में निधन हो गया है. वे पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे. वेटिकन सिटी ने सोमवार को उनके निधन की आधिकारिक जानकारी दी. पोप फ्रांसिस का जन्म अर्जेंटीना में हुआ था और वे पहले लैटिन अमेरिकी धर्मगुरु थे, जिन्हें वर्ष 2013 में कैथोलिक चर्च का सर्वोच्च पद, पोप की उपाधि मिली थी.

पूरी दुनिया में शोक की लहर

अपने 12 साल के कार्यकाल में पोप फ्रांसिस ने दुनिया भर में शांति, मानवता, पर्यावरण संरक्षण और समानता की अलख जगाई. वे सामाजिक न्याय, निर्धनों की सेवा और धार्मिक सहिष्णुता के प्रबल समर्थक रहे. उनकी सादगी, करुणा और समर्पण ने उन्हें दुनियाभर के करोड़ों लोगों का प्रिय बना दिया. उनके निधन से पूरी दुनिया में शोक की लहर है.

क्या था धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का असली नाम?

अर्जेंटीना में जन्में पोप फ्रांसिस ब्यूनस आयर्स का असली नाम जॉर्ज मारियो बेरगोलियो था. आगे चलकर वे दुनिया के सबसे बड़े ईसाई धर्मगुरु बने. उनका जन्म दिसंबर 1936 में हुआ था. उनके माता-पिता इटली से आए प्रवासी थे. उनके पिता एक अकाउंटेंट थे और मां गृहिणी थीं. जॉर्ज ने शुरुआत में साइंस की पढ़ाई की, लेकिन आगे चलकर उनका रुझान धार्मिक जीवन की ओर बढ़ा. 1969 में वे पादरी बने और फिर स्पेन में धर्म की गहराई से पढ़ाई की.

1973 में बने जेसुइट समुदाय के प्रमुख

1973 में उन्हें अर्जेंटीना में जेसुइट समुदाय का प्रमुख बनाया गया. इसके बाद मार्च 2013 में उन्हें पोप चुना गया और उन्होंने “फ्रांसिस” नाम दिया गया. वे इस पद तक पहुंचने वाले पहले लैटिन अमेरिकी, पहले जेसुइट और पहले पोप फ्रांसिस नामधारी बने. उनका चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने एक जीवित पोप (बेनेडिक्ट XVI) के बाद पद संभाला, जिन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था. पोप फ्रांसिस का कार्यकाल गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति और धार्मिक सुधारों के लिए जाना गया.

अपने कार्यकाल में किए ये बड़े काम

साल 2016 में उन्होंने शरणार्थियों के पैर धोकर सेवा और बराबरी का संदेश दिया. वहीं, 2018 में उन्होंने आयरलैंड में चर्च के कुकर्मों पर माफी मांगी और 2019 में एक बड़ा आदेश जारी किया, जिसमें सभी पादरियों और धार्मिक लोगों को यौन शोषण की जानकारी मिलने पर उसकी रिपोर्ट अनिवार्य की गई. 2023 में उन्होंने यह नियम आम चर्च नेताओं के लिए भी लागू किया. पोप फ्रांसिस को एक साधारण, जमीन से जुड़े और सुधारवादी धर्मगुरु के रूप में याद किया जाएगा.

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