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कौन हैं अली जाफरी, जिनके मोजेक डिफेंस सिस्टम के आगे पानी मांग रही अमेरिकी सेना! जानें कैसे बना ईरान का रक्षा कवच

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 28 फरवरी को लॉन्च किया था, जिसमें ईरानी सेना के रक्षा मंत्री समेत कई टॉप जनरल भी मारे गए हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान अभी लड़ रहा है.

अमेरिका-इजरायल ने शनिवार (28 फरवरी 2026) को ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी लॉन्च किया था, जो अबतक जारी है. इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और आईआरजीसी (IRGC) के टॉप जनरल मारे गए. इस घटना ने 2003 के इराक हमले की याद दिला दी, जब 2003 में सद्दाम हुसैन का सैन्य ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया था. 

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के 14 दिन बीत जाने के बाद भी ईरान इस लड़ाई में न सिर्फ टिका है, बल्कि उसने पूरे मिडिल ईस्ट को हिलाकर रख दिया है. ईरान के इस हैरान कर देने वाले प्रतिरोध के पीछे मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी की सैन्य रणनीति को कारगर माना जा रहा है. जाफरी ने 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले का बारीकी से अध्ययन किया था. उन्होंने पाया कि इराकी सेना की सबसे बड़ी कमजोरी अत्यधिक केंद्रीकृत कमान ढांचा था और सद्दाम हुसैन के आदेश के बिना इराकी कमांडर एक कदम भी नहीं हिला सकते थे इसलिए वो अमेरिका से हार गए.

क्या है मोजेक डिफेंस सिस्टम
इराक से सबक लेते हुए जनरल जाफरी ने आईआरजीसी को ईरान के 31 राज्यों के आधार पर 31 सेमी ऑटोनॉमस कमांड में बांट दिया, जिसे नाम दिया गया है मोजेक डिफेंस सिस्टम. इसका मतलब है सेना को छोटी-छोटी स्वतंत्र टुकड़ियों में बांट देना. जाफरी ने प्रत्येक प्रांत का स्वतंत्र मुख्यालय, कम्युनिकेशन सिस्टम, मिसाइल, ड्रोन भंडार और खुफिया संपत्तियां बनाई हैं. इन्हें साफ निर्देश दिए गए हैं कि अगर तेहरान के साथ संपर्क टूट जाए या केंद्रीय नेतृत्व खत्म हो जाए तो भी वे पहले से तय योजना के अनुसार स्वतंत्र रूप से युद्ध जारी रख सकते हैं. 

ईरान को कैसे मिल रहा फायदा
ईरान की भौगोलिक स्थिति ऊंचे पहाड़ और विशाल आंतरिक हिस्से का उपयोग करते हुए जाफरी ने ये रणनीति बनाई है. इससे दुश्मन की सेना को लंबे और थका देने वाले युद्ध में फंसाया जा सकता है. आज यानि (13 मार्च 2026) तक के घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि जाफरी का ऑटोपायलट मॉडल काम कर रहा है. हालांकि अमेरिका ने ईरानी रक्षा मंत्री के अलावा आईआरजीसी के टॉप कमांडरों को मार गिराया है, लेकिन इन सबके बावजूद ईरान की जवाबी कार्रवाई में कोई कमी नहीं आई. 

ईरान के प्रांतीय कमांडरों ने स्वतंत्र रूप से काम करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट में बुनियादी ढांचे जैसे तेल रिफाइनरी और समुद्री टर्मिनल को निशाना बनाया है. एक ओर जहां ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन तटस्थ देशों से माफी मांग रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर आईआरजीसी यूनिट अपनी पूर्व-निर्धारित विनाशकारी योजना पर टिकी हुई है.
 
अमेरिका-इजरायल तकनीक और मारक क्षमता के मामले में श्रेष्ठ होने के बावजूद ईरान के मोजेक डिफेंस सिस्टम को तोड़ नहीं निकाल पा रहे हैं. जनरल जाफरी ने जो बीज 2005 में बोया था, वो आज 2026 में ईरान के अस्तित्व की रक्षा कर रहा है. 

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