पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री ट्रेड लाइफलाइन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐलान किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है. IRGC का कहना है कि यह स्ट्रेटजिक रूट तब तक नहीं खोला जाएगा, जब तक अमेरिका क्षेत्र में अपना हस्तक्षेप बंद नहीं करता. इस फैसले के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
IRGC ने रखी अमेरिका के सामने शर्तईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, IRGC ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों और विदेशी शक्तियों के 'अवैध हस्तक्षेप' को देखते हुए होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला लिया गया है. बयान में कहा गया, 'होर्मुज स्ट्रेट अगली सूचना तक बंद रहेगा और तब तक कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं पाएगा, जब तक अमेरिका पश्चिम एशिया में अपना हस्तक्षेप समाप्त नहीं करता.'
अमेरिका ने शुरू किए तीसरे दौर के हमलेउधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उसकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ इस सप्ताह तीसरे दौर के सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं. CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई IRGC द्वारा M/V GFS Galaxy नामक साइप्रस-ध्वज वाले कंटेनर जहाज पर किए गए हमले के बाद की गई. अमेरिकी सेना ने कहा कि जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ. यह भी पढ़ें: ईरान को नहीं झुका पाया अमेरिका? ट्रंप ने बनाया होर्मुज का नया विकल्प, सीरिया-इराक के साथ 70 साल पुरानी तेल पाइपलाइन करेंगे शुरू
ट्रंप ने भी दी कड़ी चेतावनीइस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर दावा किया कि यदि ईरान उनकी हत्या की किसी भी कथित साजिश को अंजाम देने की कोशिश करता है, तो अमेरिका की ओर से जबरदस्त सैन्य कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका की मिसाइलें तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर ईरान के कई इलाकों को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखती हैं.
दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट परहोर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और गैस की बड़ी मात्रा गुजरती है. ऐसे में यदि यह जलमार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर व्यापक असर पड़ सकता है. फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का अगला कदम क्या होगा और क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस संकट का समाधान निकल पाएगा.
