जमीन पर तबाही, आसमान में बारूद…, ईरान से इजरायल तक 24 घंटे के भीतर बदली मिडिल ईस्ट की तस्वीर
ईरान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप असहाय नजर आ रहे हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके करीबी सहयोगी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उनकी बात तक नहीं सुन रहे.

Middle East Tensions: पश्चिमी ईरान में अगली सूचना तक सभी एयरपोर्ट बंद कर दिए गए हैं. सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द किसी भी तरीके से ईरान छोड़ने के निर्देश जारी किए गए हैं. वहीं, इजरायल में सोमवार सुबह से लगातार हमलों के कारण सायरन की आवाजें सुनाई दे रही हैं. महज 24 घंटे के भीतर मिडिल ईस्ट की तस्वीर एक बार फिर बदल चुकी है. जमीन पर तबाही का मलबा और आसमान में बारूद छाया हुआ है.
इस बीच, ईरान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप असहाय नजर आ रहे हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके करीबी सहयोगी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उनकी बात तक नहीं सुन रहे. ट्रंप को सोशल मीडिया के जरिए ईरान और इजरायल से युद्ध रोकने की अपील करनी पड़ रही है.
वेस्ट एशिया में फिर टेंशन
इजरायल पर ईरान ने सिर्फ मिसाइलें ही नहीं दागीं, बल्कि हर मिसाइल के साथ संदेश भी भेजा. इन मिसाइलों पर लिखा था-“हम लेबनान को अकेला नहीं छोड़ेंगे.” इसके बाद ईरान ने खैबर शेकन जैसी शक्तिशाली मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए, जिससे इजरायल के कई हिस्सों में अफरा-तफरी मच गई.
दरअसल, यह संघर्ष उस समय भड़क उठा जब इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका था कि अगर हिजबुल्ला पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा. इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने पलटवार किया और देखते ही देखते यह संघर्ष सीधा तेहरान और तेल अवीव के बीच युद्ध में बदल गया.
तेहरान से आई तस्वीरें चौंकाने वाली थीं. जहां एक तरफ युद्ध और दहशत का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान के स्क्वायर में बड़ी संख्या में लोग जश्न मनाते नजर आए. ये लोग अपनी सेना के समर्थन में नारे लगा रहे थे और इजरायल को जवाब देने का जश्न मना रहे थे.
इस बीच, ट्रंप लगातार सोशल मीडिया पर युद्धविराम की अपील करते रहे. उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष सीजफायर चाहते हैं और शांति के लिए अंतिम बातचीत जारी है. हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इजरायल के हमलों को अमेरिका की नीतियों से अलग नहीं देखता. इजरायल का कहना है कि उसने लेबनान में हमला इसलिए किया क्योंकि वहां से उसके नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था.
दूसरी ओर, इजरायल के अंदर भी प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. तेल अवीव की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए हैं और सरकार से युद्ध रोकने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी साफ कह रहे हैं कि वे आने वाली पीढ़ियों को युद्ध के हवाले नहीं करना चाहते.
ट्रंप की सीजफायर की अपील
28 फरवरी को शुरू हुआ यह युद्ध अब लंबा खिंच चुका है. 8 अप्रैल को भले ही अस्थायी युद्धविराम हुआ, लेकिन तनाव खत्म नहीं हुआ. अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद भी सामने आने लगे हैं. अमेरिका जहां बातचीत और कूटनीतिक समाधान चाहता है, वहीं इजरायल सैन्य दबाव बनाए रखने के पक्ष में है.
इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई, सेंसेक्स करीब 800 अंक और निफ्टी 250 अंक तक गिर गया. रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ.
ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है. यूरोपियन सेंट्रल बैंक जैसी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि लंबे युद्ध से महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास धीमा हो सकता है. इस पूरे संकट के केंद्र में है होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है. ईरान ने इस रास्ते को नियंत्रित कर रखा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ा है.
मौजूदा हालात में कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं और सैन्य तनाव हावी है. हालांकि, ईरान की ओर से यह दावा किया गया है कि उसने इजरायल पर हमले रोक दिए हैं, लेकिन चेतावनी भी दी है कि अगर लेबनान पर फिर हमला हुआ तो जवाब और कड़ा होगा. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या जल्द कोई समझौता होगा और क्या होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खुल सकेगा, ताकि ऊर्जा संकट से राहत मिल सके.
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