Iran-USA Conflict: मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. अमेरिका और ईरान के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 48 घंटे में नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरानी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला करेगा. इसके जवाब में ईरान ने भी सख्त बयान दिया है कि अगर हमला हुआ तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा.

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अमेरिकी ट्रेजरी सचिव का बयान

यूएस ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने NBC News के साथ इंटरव्यू में कहा कि ईरान की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर किलेबंदी को कमजोर करने के लिए अमेरिकी सैन्य बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है. बेसेंट ने कहा, “यह अभियान जारी रहेगा जब तक कि ईरानी किले पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाते.”

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उन्होंने मीडिया की उस रिपोर्टिंग पर भी आपत्ति जताई जिसमें युद्ध की घटनाओं को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के कदमों को जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंचाया जा रहा. उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर क्रिस मर्फी का भी नाम लिया, जिन्होंने पहले इसी प्रोग्राम में कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने युद्ध पर नियंत्रण खो दिया है और वास्तविकता से पूरी तरह कट गया है. बेसेंट ने इसे गलत बताया और कहा, “हमने ईरानी क्षमताओं को नष्ट कर दिया है.”

ईरान की सख्त चेतावनी

रायटर्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी किया है. इसमें कहा गया कि अगर ट्रंप ईरानी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला करता है, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. IRGC ने यह भी कहा कि अगर अमेरिकी शेयर वाली कंपनियों को नुकसान हुआ, तो उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा. इसके अलावा, जिन देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, वहां के ऊर्जा प्रतिष्ठान अब "कानूनी" लक्ष्य बन जाएंगे. IRGC ने स्पष्ट किया, “हमने युद्ध शुरू नहीं किया और अब भी नहीं करेंगे, लेकिन अगर दुश्मन हमारे पावर प्लांट्स को नुकसान पहुंचाता है, तो हम देश और अपने लोगों के हित की रक्षा के लिए सब कुछ करेंगे.”