Donald Trump On Houthi: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिकी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए यमन के हूती संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. यह फैसला राष्ट्रपति जो बाइडेन की तरफ हूती संगठन को आतंकवादी संगठन की सूची से हटाने के फैसले के बाद पलट दिया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज़ ने ट्विटर पर इस फैसले के बारे में जानकारी दी है. उन्होंने लिखा कि हूती एक आतंकवादी हैं, जिन्होंने महीनों तक अमेरिकी नौसेना, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और इजरायल के खिलाफ हमले किए हैं."

बाइडेन के फैसले को क्यों पलटा गया?हूती संगठन के हमले: हूती संगठन ने हाल के महीनों में अमेरिकी नौसेना और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर हमले किए हैं. साथ ही, इज़राइल और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी यह संगठन एक बड़ा खतरा बन गया है.

बाइडेन प्रशासन का फैसला: बाइडेन प्रशासन ने हूती संगठन को आतंकवादी संगठन की सूची से हटा दिया था ताकि यमन में शांति वार्ता और मानवीय सहायता में रुकावट न आए.

ट्रंप प्रशासन का रुख: डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को सुरक्षा के लिए खतरा बताया और इसे पलटते हुए हूती को एक बार फिर विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) के रूप में मान्यता दे दी.

हूती संगठन कौन हैं?हूती संगठन, जिसे अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, यमन में एक शिया विद्रोही समूह है.यह संगठन 2014 से यमन में सक्रिय है और देश के अधिकांश उत्तरी भाग पर नियंत्रण रखता है.यह सऊदी अरब समर्थित सरकार के खिलाफ लड़ाई में शामिल है.

हूती के हमलों का प्रभावहूती ने सऊदी अरब और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं.उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों और अमेरिकी संपत्तियों को भी निशाना बनाया है. वहीं हूती को आतंकवादी संगठन घोषित करने से यमन में सऊदी अरब और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है.यमन में पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट चल रहा है. इस फैसले से मानवीय सहायता में रुकावट की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि, ट्रंप के फैसले का उद्देश्य अमेरिकी नौसेना और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को सुरक्षित करना है, जो हाल के हमलों से प्रभावित हुए हैं.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएंट्रंप समर्थकों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना की है. उनका मानना है कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी था. वहीं मानवाधिकार संगठनों और कुछ विशेषज्ञों ने इस फैसले को मानवीय सहायता के लिए बाधा बताया है. उनका कहना है कि यह यमन के नागरिकों को और अधिक संकट में डाल सकता है. अमेरिकी सुरक्षा पर गहरा प्रभावडोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला न केवल अमेरिकी सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालेगा, बल्कि यमन संकट और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इसकी छाया पड़ेगी. जहां कुछ इसे सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहे हैं, वहीं मानवाधिकार संगठन इसे यमन के लिए हानिकारक मानते हैं. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह फैसला यमन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कैसे प्रभावित करता है.

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