मिडिल ईस्ट जंग के बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार (31 मार्च 2026) को ईरान की टॉप लीडरशिप को चेतावनी दी है. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दावा किया कि वो 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' के लिए तैयार हैं और संघर्ष उनकी शर्तों पर ही खत्म होगा. उन्होंने ये भी कहा कि अगर संवाद से बात नहीं बनेगी तो 'बम के जरिए बातचीत' को अंजाम दिया जाएगा.

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ईरान के खिलाफ सैन्य तैयारी में जुटा अमेरिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान को लेकर बातचीत चल रही है और इसमें तेजी आ रही है, लेकिन साथ ही सैन्य ऑप्शन भी खुले हैं. उन्होंने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका जमीनी हमला (ग्राउंड इनवेजन) भी कर सकता है. हालांकि, शायद इसकी जरूरत न पड़े.' उन्होंने कहा कि अमेरिका की रणनीति थोड़ी 'अनप्रेडिक्टेबल' यानी अनिश्चित रहने की है, ताकि दुश्मन अंदाजा न लगा सके कि अगला कदम क्या होगा? उन्होंने कहा, 'आप कोई युद्ध तब तक न तो लड़ सकते हैं और न ही जीत सकते हैं, जब तक आप अपने विरोधी को यह बता दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं, जिसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती भी शामिल है.'

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हेगसेथ ने आगे कहा, 'हमारा विरोधी इस समय सोच रहा है कि ऐसे 15 अलग-अलग तरीके हैं जिनसे हम जमीनी सैनिकों के साथ उन पर हमला कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका उन विकल्पों को अमल में ला सकता है या शायद हमें उनका इस्तेमाल करने की जरूरत ही न पड़े. शायद बातचीत से बात बन जाए. मुख्य बात यह है कि इस मामले में अप्रत्याशित बने रहें, निश्चित रूप से किसी को भी यह न पता चलने दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं.' 

कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी विकल्प: अमेरिका

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने कहा कि यूएस की सेना जिन सैन्य विकल्पों को अमल में ला सकती है, वह काफी व्यापक है. उन्होंने कहा, 'मैं राष्ट्रपति के निर्णय लेने के दायरे को सीमित नहीं करना चाहूंगा, लेकिन कई ऐसी बातें हैं, जिनमें सबसे अहम बात यह है, जिस पर ईरान को गौर करना चाहिए कि हमारे सैनिक वहां मौजूद हैं और वे एक दबाव बिंदु का काम करते हैं. मेरा मानना ​​है कि मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए उन्हें कूटनीतिक स्तर पर इस बात पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए.

वहीं, ट्रंप के नाटो पर हमलावर रवैए को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए हेगसेथ ने कहा, 'मिशन तो हमारी शर्तों पर ही खत्म होगा. राष्ट्रपति के शब्दों में कहें तो इसे लेकर कोई शक नहीं है. जहां तक नाटो की बात है, यह फैसला राष्ट्रपति पर ही छोड़ दिया जाएगा, लेकिन मैं बस इतना कहूंगा कि बहुत कुछ स्पष्ट हो गया है.' उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'दुनिया को यह दिख गया है कि जब हम आजाद दुनिया की तरफ से इतने बड़े पैमाने पर कोई कोशिश करते हैं तो हमारे सहयोगी अमेरिका के लिए क्या करने को तैयार होते हैं?'

हेगसेथ ने NATO पर निशाना साधा

उन्होंने कहा, 'उनकी मिसाइलों की रेंज में अमेरिका नहीं है. वे हमारे सहयोगियों और दूसरों तक पहुंचती हैं. फिर भी, जब हम अतिरिक्त मदद या सिर्फ बुनियादी हवाई मार्ग की अनुमति मांगते हैं तो हमें सवालों, रुकावटों या हिचकिचाहट का सामना करना पड़ता है. हेगसेथ ने अंत में ट्रंप के ट्रुथ पोस्ट का मतलब समझाते हुए कहा कि राष्ट्रपति यही इशारा कर रहे हैं कि अगर आपके पास ऐसे देश हैं जो जरूरत पड़ने पर आपके साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं, तो फिर आपके गठबंधन का कोई खास मतलब नहीं रह जाता है.