'अगर जहाज निकला तो आग लगा देंगे...', ईरान ने स्ट्रैट होर्मुज पर लगाया अड़ंगा, तेल की कीमतें बनेंगी रॉकेट
Hormuz Straight Blocked: अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग चौथे दिन भी जारी है. इसी के साथ ईरान ने होर्मुज स्ट्रैट को बंद कर दिया है. साथ ही चेतावनी दी है कि कोई जहाज गुजरा तो आग लगा दी जाएगी.

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सोमवार को बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए बंद कर दिया गया है. अगर कोई जहाज वहां से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे आग लगा दी जाएगी. ये बात ईरानी स्टेट मीडिया ने बताई है. ये फैसला ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रही जंग में एक बड़ा कदम है, जो पूरे दुनिया के तेल व्यापार को हिला सकता है.
होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर ईरान की चेतावनी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जबारी ने ये घोषणा की. उन्होंने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट बंद है. अगर कोई गुजरने की हिम्मत करेगा, तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और नेवी के जवान उन जहाजों को जला देंगे.’
ये चेतावनी ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले अमेरिका और इजरायल की जॉइंट स्ट्राइक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनी की मौत हो गई थी. इसी के बाद से मिडिल ईस्ट में हालात बहुत खराब हो गए हैं.
होर्मुज स्ट्रेट क्या है और क्यों खास है?
ये फारस की खाड़ी का एक संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है. यहां से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, UAE और खुद ईरान से तेल और गैस के जहाज निकलते हैं. ज्यादातर ये सप्लाई एशिया, खासकर चीन को जाती है.
ये स्ट्रेट करीब 33 किलोमीटर चौड़ा है सबसे संकरे हिस्से में और ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. ईरान और ओमान की तरफ से यहां का पानी कंट्रोल होता है, लेकिन ये इंटरनेशनल वाटरवे माना जाता है, जहां जहाजों को गुजरने का हक है. दुबई जैसी जगहें इसके ठीक बाहर हैं.
अगर यहां ट्रैफिक रुक गया, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. पहले फरवरी में ईरान ने मिलिट्री एक्सरसाइज के दौरान कुछ हिस्सों में ट्रैफिक रोका था, तो तेल के दाम 6 प्रतिशत तक बढ़ गए थे. ईरान ने पहले भी कई बार धमकी दी है कि वो ये रास्ता बंद कर देगा, लेकिन 1980 के दशक की टैंकर वॉर के बाद कभी पूरी तरह बंद नहीं किया. उस वक्त ईरान और इराक ने जहाजों पर हमले किए थे और माइंस बिछाई थीं.
इस क्राइसिस की शुरुआत कैसे हुई?
अमेरिका और इजरायल की स्ट्राइक में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने बदला लिया. उन्होंने कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देशों पर मिसाइलें दागीं, जहां अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं. इसके अलावा UAE, सऊदी अरब और ओमान पर भी हमले किए.
दुनिया भर में लोग ये सोच रहे हैं कि आगे क्या होगा. तेल की सप्लाई रुकने से एशिया के बाजारों पर बुरा असर पड़ेगा. सऊदी और UAE के पास कुछ पाइपलाइन रूट्स हैं जो होर्मुज को बायपास कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर तेल के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है. अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, यहां से निकलने वाला ज्यादातर तेल किसी और रास्ते से नहीं जा सकता है.
Source: IOCL

























