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ईरान युद्ध की आग से हिली दुनिया, दुनिया में पेट्रोल महंगा, भारत में क्यों स्थिर? महंगाई के खतरे के बीच ‘एनर्जी टेस्ट’ में देश की असली परीक्षा

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज के जरिए दुनिया के करीब 20% तेल और एलएनजी की आवाजाही होती है. ऐसे में यहां संकट गहराने से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होना तय है.

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच पेट्रोल-डीजल की दरें एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं. कई देशों में ईंधन महंगा होने की खबरों के बीच भारत में कीमतों के अपेक्षाकृत स्थिर रहने को लेकर सवाल और बहस दोनों बढ़ गए हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर टैक्स ढांचा, रिफाइनिंग लागत और मुद्रा विनिमय दर का बड़ा प्रभाव होता है. केंद्र और राज्य सरकारों के करों के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर सीधे और तुरंत नहीं दिखता.

मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाने वाला संकट बन चुका है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने तेल आपूर्ति की सबसे अहम धुरी- होर्मुज जलडमरूमध्य- को संकट में डाल दिया है. इसका असर अब दुनिया के हर कोने में महसूस हो रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है.

तेल कीमतों में तेजी का असर सीधे आम लोगों की जेब और बाजार के मूड पर दिखने लगा है. सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,555 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी भी करीब 480 अंक टूट गया. वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों की निकासी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज के जरिए दुनिया के करीब 20% तेल और एलएनजी की आवाजाही होती है. ऐसे में यहां संकट गहराने से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होना तय है. अनुमान है कि मध्य पूर्व में रोजाना 70 से 100 लाख बैरल तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है. यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है.

एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने कहा, 'इतना लंबा युद्ध खींचने के बाद भी अभी तक केंद्र और राज्य सरकारों ने ऑर्डिनेरी कंज्यूमर (आम उपभोक्ताओं) को राहत दी हुई है. दुनिया में खराब हालात हैं, फिर भी आम लोगों को भी राहत दी हुई है, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बाद भी आम उपभोक्ताओं को किसी भी प्रभाव से बचाकर रखा हुआ है. तेल कंपनियां बढ़ते क्रूड ऑयल की कीमतों के बीच खुद नुकसान झेल रही हैं, भरपाई कर रही हैं. अगर युद्ध लगातार चलता रहता है तो तेल कंपनिया इस संकट से कैसे जूझती हैं, इसको देखना होगा.'

क्या सिर्फ बाजार प्रभावित?
ईंधन दरों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता. ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से खाद्य और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बनता है, जिससे महंगाई का जोखिम बढ़ सकता है. यही वजह है कि वैश्विक तेल बाजार में हर हलचल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम मानी जाती है.

इस वैश्विक उथल-पुथल का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है. ताइवान में पेट्रोल महंगा होने से टैक्सी चालकों की आय घट रही है, चीन में ईंधन कीमतें बढ़ने की आशंका है और क्यूबा में बिजली संकट ने आम जीवन को झटका दिया है. पाकिस्तान में तो हाई-ऑक्टेन ईंधन पर टैक्स बढ़ाकर कीमतें तीन गुना तक कर दी गई हैं.

भारत में सरकार का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा, 'पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ या फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है. उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित है.' सरकार का तर्क है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर आर्थिक नीति के कारण भारत वैश्विक संकट के बावजूद मजबूती से खड़ा है.

सरकार vs विपक्ष
राजनीतिक रूप से भी पेट्रोल-डीजल कीमतें हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही हैं. सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ इसे जनहित और आर्थिक नीति से जोड़कर देखते हैं. बीजेपी नेता गौरव वल्लभ ने कहा, 'क्या इतनी गंभीर भू-राजनीतिक स्थिति के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े? पड़ोसी और यूरोपीय देशों में 25-40 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ीं, लेकिन भारत की मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति ने इसे संभाला है.'

हालांकि विपक्ष सरकार के दावों से सहमत नहीं है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रुपये की गिरावट और औद्योगिक ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को भविष्य की महंगाई का संकेत बताया. उन्होंने कहा, 'रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में तेज उछाल सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि आने वाली महंगाई का साफ संकेत हैं.'

हवाई यात्रा महंगी!
ऊर्जा संकट का असर एविएशन सेक्टर पर भी पड़ रहा है. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, 'एटीएफ कीमतों का असर 1 अप्रैल से दिखाई दे सकता है.' एयरलाइंस ने पहले ही ईंधन सरचार्ज बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे हवाई यात्राएं महंगी हो सकती हैं.' विश्लेषकों का मानना है कि भारत की ऊर्जा कूटनीति और वैकल्पिक स्रोतों- सौर, परमाणु और ग्रीन हाइड्रोजन- पर जोर दीर्घकाल में राहत दे सकता है. हालांकि अल्पकाल में महंगाई, रुपये और बाजार पर दबाव बना रह सकता है.

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आज (23 मार्च, 2026) से घरेलू हवाई किरायों पर लगाए गए अस्थायी फेयर कैप हटाने का फैसला किया है. यह नियंत्रण व्यवस्था पिछले साल बड़े पैमाने पर उड़ान बाधित होने और टिकट कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी को रोकने के लिए लागू की गई थी. मंत्रालय ने आदेश में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किराया नियंत्रण अब आवश्यक नहीं है. इस पर एविएशन विशेषज्ञ सनत कौल ने कहा, 'किरायों पर निचली और ऊपरी सीमा तय करने के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए. सेक्टर में प्रतिस्पर्धा जरूरी है, लेकिन जब डुओपॉली हो और जनहित जुड़ा हो, तो यह देखना होगा कि अत्यधिक किराया न लिया जाए.'

क्या होगा सकता है आगे?
आने वाले समय में वैश्विक तेल आपूर्ति, भू-राजनीतिक हालात और घरेलू नीति फैसले तय करेंगे कि भारत में ईंधन कीमतों का रुख कैसा रहेगा. फिलहाल, पेट्रोल के दाम सिर्फ आर्थिक आंकड़े नहीं, बल्कि आम आदमी के बजट और देश की विकास गति से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुके हैं. ईरान युद्ध का असली असर आने वाले महीनों में साफ होगा. फिलहाल यह संकट भारत की आर्थिक मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा और नीति-निर्णय की क्षमता की बड़ी परीक्षा बन चुका है. दुनिया के बदलते समीकरणों के बीच सवाल यही है- क्या भारत इस वैश्विक ऊर्जा तूफान से सुरक्षित निकल पाएगा या महंगाई की आंच आम लोगों तक पहुंचेगी?

 

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मयंक प्रताप सिंह एक वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ प्रोफेशनल हैं, जिनके पास इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 18 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उन्होंने देश के प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ काम करते हुए ब्रेकिंग न्यूज़, पॉलिटिकल कवरेज, ग्राउंड रिपोर्टिंग और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अपने करियर की शुरुआत से ही मयंक ने न्यूज़रूम की बदलती जरूरतों के अनुरूप टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर कंटेंट डेवलपमेंट और न्यूज़ मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल की. उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप में लंबे समय तक कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख खबरों, विशेष श्रृंखलाओं और डिजिटल न्यूज़ पैकेजिंग पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने GNT (Good News Today) में इनपुट लीड के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़रूम ऑपरेशन, स्टोरी प्लानिंग, रिपोर्टर कोऑर्डिनेशन और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारियाँ संभालीं. ज़ी न्यूज़ में रहते हुए उन्होंने मल्टी-प्लेटफॉर्म न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल एंगल स्टोरीज़ और स्पेशल प्रोजेक्ट्स पर काम किया. IBN7 (वर्तमान News18 India) में इनपुट टीम का हिस्सा रहते हुए मयंक ने पॉलिटिकल, सोशल और नेशनल इश्यूज़ पर कई महत्वपूर्ण कवरेज को लीड किया. वर्तमान में मयंक सिंह ABP News में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए कंटेंट स्ट्रेटेजी, ब्रेकिंग न्यूज़ मैनेजमेंट, एक्सप्लेनेर और इन-डेप्थ वेब कॉपीज़ पर विशेष ध्यान देते हैं. वे SEO-फ्रेंडली न्यूज़ लेखन, डेटा-ड्रिवन स्टोरीज़, ग्राउंड-आधारित रिपोर्टिंग और रियल-टाइम डिजिटल पब्लिशिंग में दक्ष हैं. मयंक की पत्रकारिता का फोकस राजनीति, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, पब्लिक पॉलिसी और ग्राउंड रियलिटी आधारित रिपोर्टिंग रहा है. वे न्यूज़रूम में स्पीड, एक्युरेसी और एनालिटिकल अप्रोच के लिए जाने जाते हैं. उनका उद्देश्य डिजिटल युग में पाठकों को विश्वसनीय, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उपलब्ध कराना है.

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