40 दिनों की जंग और चट्टान की तरह खड़ा ईरान… US-इजरायल जंग में कौन सी ताकतें दे रही थी साथ?
US Iran War: जंग मिसाइलों- ड्रोन के अलावा कई मोर्चे पर चला. इनमें कूटनीति से लेकर पोप का साथ भी शामिल रहा. आइए समझते हैं, कि ईरान के समर्थन में कौन थे, जिन्होंने अमेरिका को पीछे हटने को मजबूर किया.

US Iran War: मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका इजरायल की ईरान के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई पर दो हफ्तों का विराम लग गया है. अमेरिका ने सशर्त सीजफायर का ऐलान कर दिया है. इस बीच अमेरिका से सीधी टक्कर ले रहा ईरान के पीछे कई ताकतें थीं, जो उसके साथ खड़ी थीं. जो या तो प्रत्यक्ष तौर पर ईरान के समर्थन में युद्ध के मैदान में दो-दो हाथ कर रहे थे, या फिर अप्रत्यक्ष तौर पर उसके साथ थीं. ये वो ताकतें थीं, जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को झुकने के लिए मजबूर कर दिया.
यह युद्ध मिसाइलों और ड्रोन के अलावा कई मोर्चे पर चल रहा था. इनमें कूटनीतिक जंग से लेकर पोप का साथ भी शामिल रहा. आइए समझते हैं, कि ईरान के समर्थन में कौन थे, जिन्होंने अमेरिका को आखिरकार, भले ही कुछ हफ्तों के लिए, पीछे हटने के लिए मजबूर किया.
कूटनीतिक जंग में रूस और चीन की अहम भूमिका
- इस युद्ध में अमेरिका के प्रस्तावों की हवा यूएन में रूस और चीन ने निकाली. इन दोनों देशों ने हर बार सुरक्षा परिषद में अमेरिकी कोशिशों को वीटो कर दिया.
सामरिक जंग में ईरान के साथ कई ग्रुप अपनी भूमिका निभाते रहे
- इस युद्ध में सामरिक जंग भी देखने को मिली. इनमें हूती, हिजबुल्ला और ईराकी मिलिशिया ने खुलकर जंग लड़ी. चीन ने तकनीक और रुस ने इंटिलिजेंस और हथियारों से मदद की.
शांति के लिए युद्ध के बीच ये देश पहल करते रहे
- इस युद्ध में ईरान के लिए युद्ध में शांति के साथी कई देश बने रहे. इनमें खाड़ी में ओमान ने जंग का विरोध किया. इसके कारण स्ट्रेड ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए अमेरिका के लिए असंभव सा हो गया. साथ ही इराक ने इस युद्ध में जमीन पर किसी तरह की मदद नहीं की.
यूरोप और एशियाई देशों की अहम भूमिका
- तबाही के स्तर तक पहुंच चुके इस युद्ध में यूरोप और एशिया महाद्वीप के देशों ने अहम भूमिका निभाई. नाटो के सदस्यों ने इसे अपनी जंग मानने से इंकार दिया. एशिया में अमेरिकी सहयोगी साउथ कोरिया और जापान ने साथ देने से इंकार कर दिया.
पोप ने नहीं बनने दिया इसे धर्म युद्ध
- इधर पोप ने भी इस युद्ध में अहम भूमिका निभाई. पोप ने इस जंग के खिलाफ जितने भी बयान दिया, उसके कारण ट्रंप ने इसे धर्म युद्ध नहीं बनने दिया.
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