US-Israel Attack Iran: ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जंग, अमेरिका लहूलुहान, ट्रंप की विदेश नीति पर उठे सवाल
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ चुकी है. इस मुद्दे पर पूर्व अमेरिकी राजनयिक हेनरी एनशर ने अमेरिका की विदेश नीति और इजरायल पर सवाल खड़ा किए हैं.

इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ चुकी है. क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर आ गए हैं. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत, दुबई और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले किए. इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती दी है, बल्कि अमेरिका की विदेश नीति को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है. इसी संबंध में अमेरिकी राजदूत और उप सहायक विदेश मंत्री रह चुके हेनरी एनशर (Henry Ensher) का बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने वॉशिंगटन की बयानबाज़ी और नीति के संकेतों पर सवाल उठाए हैं.
हेनरी एनशर ने कहा कि वॉशिंगटन से आ रही युद्ध संबंधी बयानबाज़ी नई शंकाएं पैदा कर सकती है. उनके मुताबिक, अगर यह मैसेज दिया जाता है कि ईरान पर हमला इसलिए जरूरी है क्योंकि इजरायल ऐसा करने वाला है तो इससे यह धारणा मजबूत हो सकती है कि अमेरिका की मध्य पूर्व नीति इजरायल की इच्छा के अनुसार काम कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विश्लेषक तो यहां तक मानते हैं कि इजरायल ही अमेरिका की मध्य पूर्व नीति को दिशा दे रहा है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और इजरायल के सैन्य सहयोग पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है.
क्या अमेरिका की नीति इजरायल-प्रेरित है?
मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल के रणनीतिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं. दोनों देश सुरक्षा, खुफिया साझेदारी और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में करीबी साझेदार हैं, लेकिन जब सैन्य कार्रवाई को इजरायल की संभावित कार्रवाई से जोड़ा जाता है तो आलोचकों को यह कहने का अवसर मिलता है कि वॉशिंगटन की नीति स्वतंत्र निर्णय के बजाय सहयोगी के प्रभाव में है. एनशर ने इशारा किया है कि इस तरह की सार्वजनिक भाषा अमेरिका की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकती है और यह सवाल खड़े कर सकती है कि क्या फैसला अमेरिकी राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिए जा रहे हैं या किसी सहयोगी देश के दबाव में.
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता
ईरान की ओर से बहरीन, कुवैत, दुबई और यूएई में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. खाड़ी देशों में एयर डिफेंस अलर्ट पर है. ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों पर खतरा मंडरा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरा पड़ सकता है.
Source: IOCL
























