अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के बीच सुलह की कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं. यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत जारी रहने की बात कही है. बीती रात (22 मार्च) को व्हाइट हाउस से सलाहकार स्टीव बिटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरान के साथ बातचीत में हिस्सा लिया था. तीन क्षेत्रीय देशों के विदेश मंत्रियों ने व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ अलग-अलग वार्ता की. इसी बीच यह भी खुलासा हुआ है कि ईरान-यूएस के बीच युद्ध खत्म कराने को लेकर तीन मुस्लिम देश मध्यस्थता कर रहे हैं.
US-ईरान के बीच कौन करा रहा मध्यस्थता?
अमेरिकी समाचार आउटलेट Axios ने एक अमेरिकी सूत्र के हवाले से बताया कि पिछले दो दिनों से तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं. तीनों देश अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के प्रतिनिधि व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात कर चुके हैं. साथ ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी अलग से मिले.
ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत की कही बात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले दावा किया कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए ईरान के साथ सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत जारी है. उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को 5 दिन के लिए टाल दिया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से चली बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका की ईरान के साथ सकारात्मक और उत्पादक बातचीत हुई है. ट्रंप ने आगे कहा, 'चर्चाओं का ये दौर पूरे हफ्ते जारी रहेगा। दोनों देशों के बीच गहन और विस्तृत चर्चाओं के सकारात्मक रवैए को देखते हुए, मैंने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैन्य हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए.'
क्या ट्रंप पर बन रहा दबाव?
शुरुआत में ट्रंप ने इसे एक तेज और निर्णायक कार्रवाई बताते हुए ईरान के नेतृत्व, मिसाइल क्षमता और परमाणु ढांचे को खत्म करने की बात कही थी, लेकिन अब जंग लंबी खिंचता दिख रही है. खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर हमले हुए हैं और होर्मुज स्ट्रेट के अधिकतर हिस्से में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा है. अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों का दबाव भी है. वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रख ट्रंप अब इस टकराव से निकलने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं.
