ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से संबोधन दिया. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान पर और बड़े हमले होंगे.  ट्रंप ने कहा कि 'जब तक सारे लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, अमेरिका के हमले जारी रहेंगे.'

Continues below advertisement

'ईरान अमेरिका के लिए बन गया था खतरा'

ट्रंप ने कहा, 'आज, अमेरिकी सेना ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला रही है ताकि इस भयानक आतंकवादी शासन से अमेरिका को होने वाले गंभीर खतरों को समाप्त किया जा सके. ईरान का पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम तेज़ी से और नाटकीय रूप से बढ़ रहा था. इससे अमेरिका और विदेशों में तैनात हमारी सेनाओं के लिए एक स्पष्ट और बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया था.'

Continues below advertisement

'ईरान के पास थीं खतरनाक मिसाइलें'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'ईरान के पास पहले से ही यूरोप और हमारे ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम मिसाइलें थीं, और जल्द ही उसके पास हमारे खूबसूरत अमेरिका तक पहुँचने में सक्षम मिसाइलें भी होंगी. इस तेज़ी से बढ़ते मिसाइल कार्यक्रम का उद्देश्य अपने परमाणु हथियार विकास को छिपाना और किसी के लिए भी इन अत्यधिक प्रतिबंधित परमाणु हथियारों के उत्पादन को रोकना बेहद मुश्किल बनाना था.'

'47 साल से अमेरिकी लोगों को मार रहा था ईरान'

ट्रंप ने आगे कहा, '47 साल से ईरान अमेरिकियों को मार रहा था. हम ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट कर रहे हैं. आप इसे हर घंटे होते हुए देख रहे हैं, साथ ही उनकी नई और अच्छी मिसाइलें बनाने की क्षमता भी कम हो रही है. दूसरा, हम उनकी नौसेना को पूरी तरह से नष्ट कर रहे हैं. हम पहले ही 10 जहाजों को नष्ट कर चुके हैं. वे समुद्र की तलहटी में डूबे हुए हैं.'

खिंच सकता है युद्ध

ट्रंप ने कहा,  'शुरू से हमने युद्ध के चार से पांच सप्ताह चलने का अनुमान लगाया था, लेकिन हमारे पास इससे कहीं अधिक समय तक काम करने की क्षमता है. हम इसे कर लेंगे. आज किसी ने कहा, राष्ट्रपति इसे बहुत जल्दी करना चाहते हैं. उसके बाद तो वे ऊब जाएंगे. मैं नहीं ऊबता, इसमें उबाऊ कुछ भी नहीं है.जैसा कि आप जानते हैं इसे लगभग एक घंटे में पूरा कर लिया, इसलिए हम इस मामले में निर्धारित समय से काफी आगे हैं.'

'ईरान ने चेतावनियों को किया अनसुना'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा,  'ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने के बाद, हमने ईरान को चेतावनी दी थी कि वह किसी अन्य स्थान पर परमाणु कार्यक्रम का पुनर्निर्माण करने का प्रयास न करे, क्योंकि वे उन परमाणु संयंत्रों का उपयोग नहीं कर सकते जिन्हें हमने इतनी शक्ति से नष्ट कर दिया था. लेकिन उन्होंने हमारी चेतावनियों को अनसुना कर दिया और परमाणु हथियार बनाने का अपना प्रयास जारी रखा.'