अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ जंग में इसलिए उतरा क्योंकि पागलों के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने  कहा कि सीज़फायर के बाद अब यह दुश्मनी खत्म हो चुकी है. इसी बीच खबर है कि ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को बातचीत के लिए नया प्रस्ताव भेजा है. लेकिन ट्रंप ने इस ऑफर को लेकर असंतोष जताया. उनका कहना है कि ईरान ऐसी शर्तें रख रहा है जिन्हें वह मान नहीं सकते. उन्होंने ईरान की लीडरशिप को भी एकमत न होने वाला बताया.

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हालांकि बातचीत चल रही है और तीन हफ्तों से सीज़फायर भी जारी है, फिर भी ट्रंप ने कहा कि जंग खत्म हो गई है. व्हाइट हाउस ने भी कांग्रेस को यही जानकारी दी है कि ईरान के साथ दुश्मनी खत्म हो चुकी है, जबकि इलाके में अमेरिकी सेना अब भी तैनात है. यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के तहत 1 मई की समय सीमा खत्म हो गई, जिसमें 60 दिनों के भीतर सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है. ट्रंप ने इस कानून को गैर-संवैधानिक बताया और इसे मानने से इनकार कर दिया. वहीं, सीनेट में डेमोक्रेट्स की ओर से युद्ध रोकने की कोशिश भी खारिज हो गई.

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हालात पूरी तरह शांत नहीं-ट्रंपकांग्रेस को लिखे एक पत्र में ट्रंप ने संकेत दिया कि हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि ईरान से अमेरिका और उसकी सेना को अब भी खतरा बना हुआ है और शांति बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. दूसरी तरफ, ईरान का कहना है कि वह यूरेनियम को शांतिपूर्ण कामों के लिए समृद्ध करने का अधिकार रखता है, जबकि पश्चिमी देश इस पर सवाल उठाते रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि अगर अमेरिका अपना रवैया बदले और दबाव बनाना बंद करे, तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है.

सैन्य कार्रवाई बढ़ाई जा सकती है- ट्रंपट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई बढ़ाई जा सकती है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसा करना नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि विकल्प दो ही हैं या तो पूरी तरह हमला किया जाए या फिर समझौता किया जाए, और इंसानी नजरिए से वह समझौते को बेहतर मानते हैं.

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