US-Iran Peace Deal: अमेरिका-ईरान जंग से समझौते तक... 107 दिनों में कब क्या हुआ? ये रही पूरी टाइमलाइन
US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते तक 107 दिनों में क्या-क्या हुआ? जानिए 28 फरवरी से 14 जून 2026 तक युद्ध, बातचीत, संघर्ष विराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ा पूरा घटनाक्रम.

मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हो गया है. इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इसकी घोषणा की. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है.
ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी इस समझौते की पुष्टि की है. हालांकि इस समझौते तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था. पिछले 107 दिनों में कई सैन्य कार्रवाई, बातचीत, संघर्ष विराम और कूटनीतिक प्रयास हुए.
अमेरिका-ईरान युद्ध का टाइमलाइन
- 28 फरवरी को अमेरिका ने "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" शुरू किया और इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया.
- 8 अप्रैल को करीब 40 दिनों के संघर्ष के बाद एक अंतरिम समझौता हुआ और 14 दिनों का संघर्ष विराम लागू किया गया.
- 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बैठक हुई. इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
- 20 अप्रैल को दूसरे दौर की वार्ता की कोशिश हुई, लेकिन ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया.
- 25 अप्रैल को ईरानी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व अब्बास अराघची कर रहे थे, पाकिस्तान पहुंचा.
- 30 अप्रैल को ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना प्रस्ताव दिया, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया.
- 18 मई को ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा. इसके बाद अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में कुछ नरमी दिखाने का संकेत दिया.
- उसी दिन पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ईरान पहुंचे और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की.
- 22 मई को पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे. उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और गालिबाफ से मुलाकात की, लेकिन कोई ठोस समझौता या रूपरेखा तय नहीं हो सकी और वे वापस लौट गए.
- 27 मई को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत चल रही है और या तो शानदार समझौता होगा या फिर दोनों पक्ष युद्ध के मैदान में लौट सकते हैं. इसी दिन बंदर अब्बास के पास सुबह चार धमाकों की खबर आई और अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए.
- 1 जून 2026 को अमेरिका ने कहा कि उसने सप्ताहांत में ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया. ईरान ने कुवैत में स्थित एक अमेरिकी बेस पर हमला करने की भी बात कही.
- 5 जून 2026 को ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को बीच में ही रोक दिया गया. इसके बाद अमेरिका ने ईरानी रडार साइटों पर जवाबी हमला किया. ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया और उसके एक सलाहकार ने कहा कि बातचीत लगभग ठप हो गई है.
- 6 जून 2026 को अमेरिकी सेंटकॉम ने बताया कि उसने जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे 4 से 6 ईरानी हमलावर ड्रोन मार गिराए. साथ ही क़ेशम द्वीप पर रडार स्थलों को निशाना बनाया गया. इससे पहले का नाजुक युद्धविराम फिर तनाव में बदल गया.
- 7 जून 2026 को ईरान ने स्ट्रेट की ओर कई ड्रोन भेजे, जिनमें से चार को अमेरिका ने मार गिराने का दावा किया. बातचीत में गतिरोध बना रहा और कूटनीतिक कोशिशों पर सैन्य तनाव भारी पड़ता दिखाई दिया. हालात और बिगड़ने की आशंका भी बढ़ गई.
- 9 जून 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर गिर गया. डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि की.
- 10 जून 2026 को अमेरिका ने हेलिकॉप्टर गिराए जाने के बाद ईरान पर फिर से हवाई हमले किए. इसके साथ ही युद्धविराम टूट गया और सेंटकॉम ने सैन्य गतिविधियां जारी रहने की जानकारी दी.
- 11 जून 2026 को लगातार दूसरे दिन दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी रहा. ईरान ने दावा किया कि उसने खाड़ी देशों में मौजूद 18 अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया है. अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया.
- 13 जून 2026 को बातचीत के बीच दक्षिणी लेबनान पर इजरायल के नए हवाई हमले हुए, जिनमें कम से कम पांच लोगों की मौत हुई. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब शांति समझौता लगभग अंतिम चरण में था, तब ऐसे हमले नहीं होने चाहिए थे.
- 14 जून 2026 को कतर के मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तेहरान पहुंचे. इसी दौरान लेबनान में तनाव बढ़ने के बावजूद ट्रंप ने कहा कि दोनों देश शांति समझौते के बहुत करीब हैं.
पाकिस्तान में हुई थी शांति वार्ता की बैठक
शांति की कोशिशों के दौरान 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान में हुई पहली बैठक बेनतीजा रही. 20 अप्रैल को दूसरा दौर नहीं हो सका क्योंकि ईरान ने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया. 25 अप्रैल को ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचा और 30 अप्रैल को ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना प्रस्ताव दिया. 18 मई को 14 सूत्रीय प्रस्ताव अमेरिका को भेजा गया और अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में नरमी का संकेत दिया.
22 मई को पाकिस्तानी सेना प्रमुख की तेहरान यात्रा भी हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं बन पाया. 27 मई को ट्रंप ने कहा कि या तो शानदार समझौता होगा या फिर युद्ध का रास्ता खुलेगा. इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है. डेटा इंटेलिजेंस फर्म कप्लर के अनुसार, फ़ारस की खाड़ी में अभी भी लगभग 600 जहाज़ फंसे हुए हैं और बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ सैकड़ों जहाज़ खाली खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें: US- Iran Peace Deal: होर्मुज होगा फ्री! अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बोला UN- 'शांति की दिशा में...'























