महीनों तक चले लंबे संघर्ष के बाद अब आखिरकार अमेरिका-ईरान के बीच डील हो गई है. डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एमओयू पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं. अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने बुधवार (17 जून) को इस एमओयू पर साइन किए. इसके बाद यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

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अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान एग्रीमेंट की हार्ड कॉपी पर भी आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए है. उन्होंने बताया कि साइन किए गए एग्रीमेंट की कॉपी ईरान और मध्यस्थ करा रहे देशों को भी भेज दी गई है. 

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने रविवार को एमओयू पर इलेक्ट्रानिक रूप से साइन किए थे. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि एमओयू पर साइन होने के बाद अब दोनों देशों के बीच लगभग 4 महीनों से चला आ रहा संघर्ष खत्म हो गया है. 

जिनेवा में मुलाकात का कार्यक्रम अभी भी तय

डील साइन होने के बावजूद शुक्रवार को अमेरिका-ईरान के अधिकारियों का जिनेवा में मुलाकात का कार्यक्रम तय है. ईरानी अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक का मकसद समझौते पर हस्ताक्षर करना नहीं है. हालांकि ये मीटिंग असल में होगी या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अगले कुछ घंटों में लिए जाने की उम्मीद है.

क्या बोले इस्माइल बघाई

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान को अपने तेल की बिक्री बिना किसी परिवहन या बीमा संबंधी बैन के करने की अनुमति मिलनी चाहिए. उससे होने वाले इनकम पर उसकी पूरी तरह पहुंच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों तक उसकी पहुंच में मौजूद दिक्कतों को हटाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई की है. 

इस डील के बाद ईरान का कहना है कि अगले 60 दिनों तक दोनों देशों को संयम बरतना होगा और ऐसे किसी भी राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदम से बचना होगा जिससे समझौते के क्रियान्वयन पर नकारात्मक असर पड़े.

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