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US-Iran Peace Deal: ट्रंप की ईरान डील में क्यों हो रही देरी, मुश्किल बातचीत और मैसेज पहुंचने में बड़ी बाधा क्या?

US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते में देरी हो रही है. इसके पीछे कई तरह की वजह है, जिसको लेकर अमेरिका टेंशन में है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को खत्म करने के लिए एक समझौता जल्द होने वाला है. उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच डील बहुत जल्दी पूरी हो जाएगी और इस सप्ताह के अंत तक इस पर हस्ताक्षर भी हो सकते हैं. हालांकि ईरान ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने रिपोर्ट दी है कि वहां के नेताओं ने अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के मसौदे को मंजूरी नहीं दी है.

ट्रंप के लगातार दिए जा रहे बयानों के पीछे सिर्फ दबाव बनाने या समझौते के लिए माहौल तैयार करने की कोशिश ही नहीं है, बल्कि एक बड़ी वजह दोनों देशों के बीच बातचीत की बेहद जटिल और पुरानी प्रक्रिया भी है. अमेरिकी अधिकारियों, एक्सपर्ट्स और इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है. इसके बजाय मैसेज के लेन-देन की एक लंबी और धीमी प्रक्रिया चल रही है, जिसमें एक संदेश को दूसरी तरफ पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं.

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ईरान तक अमेरिकी मैसेज पहुंचने में होती है देरी

अमेरिकी प्रस्ताव सीधे ईरान तक नहीं पहुंचते, बल्कि उन्हें एक लंबे और घुमावदार रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. बताया जाता है कि ईरानी पक्ष कई बार मैसेंजर का इस्तेमाल करता है ताकि सर्वोच्च नेता मुज्बता खामेनेई का ठिकाना गुप्त रखा जा सके. इस कारण कई बार एक संदेश पहुंचने में ही 48 घंटे तक का समय लग जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रस्ताव पहले पाकिस्तानी अधिकारियों के माध्यम से टेलीफोन या व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए तेहरान तक पहुंचाए जाते हैं. इसके बाद ही संबंधित दस्तावेज या मैसेज आगे भेजे जाते हैं.

इस पूरी प्रक्रिया के कारण बातचीत की गति काफी धीमी हो जाती है. एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने इस प्रक्रिया को बेहद धीम बताया है. उनका कहना है कि अगर अमेरिका ईरान की सभी मांगों को मान भी ले, तब भी समझौते पर हस्ताक्षर होने में कम से कम 5 दिन लग सकते हैं, क्योंकि संदेशों के आने-जाने और मंजूरी की प्रक्रिया में काफी समय लगता है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जताई चिंता

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी सार्वजनिक रूप से इस धीमी प्रक्रिया पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि ईरान की तरफ से किसी भी प्रस्ताव का जवाब आने में लगभग पांच से छह दिन लग जाते हैं, जिससे बातचीत आगे बढ़ने में देरी होती है. फिलहाल दोनों पक्ष सबसे पहले युद्ध रोकने के लिए एक समझौते पर काम कर रहे हैं. वहीं परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और अन्य जटिल मुद्दों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को बाद की बातचीत के लिए छोड़ दिया गया है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में किसी समझौते पर सहमति बन पाती है.

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पत्रकारिता के क्षेत्र में 21 साल से सक्रिय हैं. साल 2004 में स्टार न्यूज़ से जुड़े और इस समय एबीपी न्यूज़ में इनपुट एडिटर हैं. इन्होंने असाइंमेंट हेड और फॉरवर्ड प्लानिंग के काम को अलग-अलग पदों पर रहने के साथ ही बतौर हेड बख़ूबी अंजाम दिया. साल 2022 में डिजिटल मीडिया से भी नाता जोड़ा. 
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