107 दिन तक जारी रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए यूएस और ईरान के बीच सहमति बन चुकी है. स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर साइन किए जाएंगे. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (14 जून) शाम ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह घोषणा की. इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने का रास्ता भी साफ हो गया है. पीस डील पर सहमति बनने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम होगा.

यूएस-ईरान पीस डील की बड़ी बातें

1 -  अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनी है. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की ओर से इसकी पुष्टि की गई है. डील पर स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे. इसमें अमेरिका से जेडी वेंस और ईरान से अराघची और गालिबफ शामिल होंगे.

2 -  दोनों देश सैन्य अभियानों पर फौरन रोक लगाएंगे. समझौते में लेबनान से जुड़े संघर्ष को खत्म करने का प्रस्ताव भी शामिल है. 

3 - अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को कराने में पाकिस्तान ने मध्यस्थ होने की भूमिका निभाई. पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर पोस्ट कर पीस डील की घोषणा की.

4 - 60 दिनों के सीजफायर के दौरान समझौते पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी. इसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों, फ्रीज फंड को रिलीज करने से लेकर परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. जब तक फाइनल समझौता लागू नहीं हो जाता, अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी.

5-  यूएस-ईरान पीस डील होने के साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के खुलने का रास्ता भी साफ हो गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल ट्रुथ पर पोस्ट कर घोषणा करते हुए कहा कि शुक्रवार से होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोल दिया जाएगा. इसके अलावा, अमेरिका ईरानी पोर्ट पर लगाए गए अपने ब्लॉकेड को भी खत्म करेगा.

6 - समझौते के ड्रॉफ्ट के तहत अमेरका ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करेगा. इसकी आधी रकम यानी 12 अरब डॉलर समझौते से पहले ही जारी की जानी है.

7 - समझौते के ड्रॉफ्ट के तहत अमेरका ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करेगा. इसकी आधी रकम यानी 12 अरब डॉलर समझौते से पहले ही जारी की जानी है.

8 - ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का विस्तार न करने का भरोसा देगा.

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9 - पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष खत्म होने और होर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलेगी. होर्मुज से तेल और एलपीजी की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है. ईरान के इसको बंद करने से ऊर्जा की सप्लाई बाधित हुई और कीमतों में भी इजाफा हुआ.

10 - अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में इजरायल औपचारिक रूप से पक्षकार नहीं है. इजरायल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते को लेकर असंतोष है.  प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने केवल इतना कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे. विपक्षी नेताओं ने इसे इजरायल की विदेश और सुरक्षा नीति की बड़ी विफलता बताया है.

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