US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव फिलहाल थम गया है, लेकिन अब दोनों देशों के बीच शांति समझौते की एक लाइन नया विवाद खड़ा कर रही है. जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर दोनों देश सहमत हुए थे, अब उसी पर अधिकार को लेकर दोनों आमने-सामने हैं. पिछले सप्ताह इस विवाद के कारण जहाजों पर हमले हुए, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए. इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया. हालांकि सोमवार को आई ताजा जानकारी के मुताबिक दोनों देश फिलहाल लड़ाई रोकने पर सहमत हो गए हैं.
चार महीने के संघर्ष के बाद हुआ था समझौता
करीब दो सप्ताह पहले अमेरिका और ईरान ने चार महीने से चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करना था. लेकिन अब इसी समझौते के अनुच्छेद-5 की अलग-अलग व्याख्या दोनों देशों के बीच नए तनाव की वजह बन गई है.
अनुच्छेद-5 में क्या कहा गया है?
समझौते के अनुच्छेद-5 में कहा गया है कि ईरान 60 दिनों तक पूरी कोशिश करेगा कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच आने-जाने वाले सभी व्यापारिक जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकें. इसके लिए समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (माइंस) को हटाया जाएगा, सैन्य बाधाओं को समाप्त किया जाएगा और जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू कराई जाएगी.
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इसके साथ ही अनुच्छेद की अंतिम पंक्ति में कहा गया है कि भविष्य में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को लेकर ईरान, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ बातचीत करेगा. यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून और तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों के आधार पर होगी. यही अंतिम पंक्ति अब दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गई है.
अमेरिका और ईरान में विवाद क्यों हुआ?
ईरान का कहना है कि इस प्रावधान का मतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सबसे बड़ा अधिकार उसी का रहेगा और भविष्य की व्यवस्था भी ईरान की भूमिका के आधार पर तय होगी. वहीं अमेरिका चाहता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संचालन अंतरराष्ट्रीय समन्वय के तहत हो, ताकि किसी एक देश का पूर्ण नियंत्रण न रहे और दुनिया भर के व्यापारिक जहाज बिना किसी बाधा के इस मार्ग से गुजर सकें. इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद गहरा गया.
तनाव कैसे बढ़ा?
तनाव उस समय और बढ़ गया जब शुक्रवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक व्यापारिक जहाज पर हमला हुआ. अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए उसके ठिकानों पर हवाई हमले कर दिए. इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे. शांति समझौते के बाद यह दोनों देशों के बीच पहली सीधी सैन्य भिड़ंत थी. हालांकि सोमवार को आई जानकारी के अनुसार दोनों देश फिलहाल संघर्ष रोकने पर सहमत हो गए हैं और मंगलवार को कतर में दोनों पक्षों के बीच बैठक होने की संभावना है.
दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता है. खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है. यदि इस मार्ग पर तनाव बढ़ता है तो सबसे पहले वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ता है.
जहाजों से शुल्क वसूलने के संकेत
ईरान पहले भी संकेत दे चुका है कि भविष्य में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जा सकता है. हालांकि अमेरिका और खाड़ी देशों ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है. ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.
