ईरान की कौनसी है वो एक शर्त, जिसे मान गया अमेरिका? क्या अब खुलेगा हॉर्मुज
US Iran Peace Talks in Pakistan: ईरान - अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से पहले बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के हवाले से पता चला कि अमेरिका ने ईरान की एक शर्त पर सहमति जताई है.

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिका ने शनिवार (11 अप्रैल) को ईरान की एक शर्त मान ली है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट मुताबिक, ईरानी सूत्रों ने बताया कि अमेरिका कतर और अन्य बैंकों में जमा ईरानी संपत्ति को जारी करने पर सहमत हो गया है. उन्होंने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचने की दिशा में गंभीरता का संकेत बताया है. अगर ईरान पर लगे प्रतिबंध हटते हैं, तो हॉर्मुज खुलने की संभावना भी बढ़ जाएगी. ईरान हॉर्मुज पर कंट्रोल और युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे की मांग कर रहा है.
दोनों देशों का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी की राजधानी में मौजूद है
6 हफ्ते चले युद्ध को समाप्त करने को लेकर ईरान और अमेरिका के वरिष्ठ नेता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौजूद हैं. ईरान ने इससे पहले यह कहकर बातचीत पर संदेह पैदा कर दिया था कि लेबनान और प्रतिबंधों के मुद्दे पर ठोस प्रतिबद्धताओं के बिना बातचीत संभव नहीं हो सकती. अमेरिका प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे. उनके अलावा राष्ट्रपति ड्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं. प्रतिनिधिमंडल के दो विमान इस्लामाबाद में मौजूद अमेरिका वायुसेना के एयरबेस पर पहुंचे हैं. जहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने उनका स्वागत किया.
ईरान का प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची कर रहे, वो भी शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंच गए हैं.1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ये अमेरिका और ईरान के बीच अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय बातचीत होगी. अगर दोनों प्रतिनिधिमंडल आमने सामने बैठकर बातचीत करते हैं, तो यह 2015 के बाद उनकी पहली और सीधी बातचीत होगी. दोनों ने 2015 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता किया था. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में उस समझौते को रद्द कर दिया था. इसी साल ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई ने दोनों देश के अधिकारियों के बीच आगे किसी भी सीधी बातचीत पर प्रतिबंध लगा दिया था.
ट्रंप बोले- ईरानियों के जिंदा होने का एकमात्र सबूत बातचीत करना है
ईरान के नेता कालिबफ ने सोशल मीडिया पर कहा है कि अमेरिका पहले ईरान की संपत्तियों से प्रतिबंध हटाने और लेबनान में युद्धविराम के लिए सहमत हो गया था. जहां मार्च में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के समर्थन में हिज्बुल्लाह लड़ाकों पर इजयरायली हमलों में लगभग 2 हजार लोग मारे जा चुके हैं. उन्होंने कहा है कि जबतक ये वादे पूरे नहीं हो जाते, तबतक बातचीत शुरू नहीं होगी.
इजरायल और अमेरिका ने कहा है कि लेबनान ऑपरेशन ईरान और अमेरिका के युद्ध विराम का हिस्सा नहीं है. ईरान के सरकारी चैनल ने कहा है कि ईरान प्रतिनिधिमंडल दोपहर के आसपास पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मिलकर संभावित बातचीत के समय और तरीके पर फैसला करेगा.
ईरान के सीनियर नेता ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि पाकिस्तान ईरान की मांगों पर अमेरिका की शुरुआती प्रतिक्रिया देगा. अगर ईरान इसको मान लेता है, तो दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत शुरू हो पाएगी. अमेरिका ने ईरान की मांगों पर तुरंत टिप्पणी नहीं की है.
इधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट कर कहा है कि ईरानियों के जिंदा होने का एकमात्र कारण किसी सौदे पर बातचीत करना है. उन्होंने कहा है कि ईरान को शायद एहसास नहीं है कि उनके पास इंटरनेशनल जलमार्ग का इस्तेमाल करके दुनिया से थोड़े समय के लिए जबरन वसूली करने के अलावा कोई और दांव नहीं है. आज उनके जिंदा होने का एकमात्र कारण बातची करना है.
Source: IOCL

























