एक्सप्लोरर

Explained: 69% ईसाई आबादी वाले अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और पोप लियो XIV में भिड़ंत क्यों? जानें स्टेट बनाम चर्च के मशहूर किस्से

Trump vs Pope: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध समझ आता है कि यह तीनों अलग धर्मों के देश हैं, लेकिन अब ट्रंप पोप लियो से भिड़ लिए हैं, जबकि ट्रंप खुद ईसाई हैं. यह अनबन सालों पुरानी है. कैसे?

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा ईसाई देश है, जहां ईसाई धर्म के लोगों की कुल आबादी 69% है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को ईसाई बताते हैं और 2024 के चुनाव में उन्होंने कैथोलिक वोटरों का 55% समर्थन हासिल किया था, लेकिन अप्रैल 2026 में पोप लियो XIV (शिकागो में जन्मे पहले अमेरिकी पोप) से उनका खुला विवाद छिड़ गया. यह टकराव मुख्य रूप से ईरान पर अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान को लेकर है. पोप ने युद्ध की निंदा की, जबकि ट्रंप ने इसे अपनी विदेश नीति पर हमला माना और पोप पर सीधा हमला बोल दिया. एक्सप्लेनर में समझते हैं स्टेट और चर्च के बीच के सालों से चली आ रही टकराव की दास्तां...

सवाल 1: ईरान युद्ध पर ट्रंप और पोप के विवाद की पूरी कहानी क्या है?
जवाब: विवाद जनवरी 2026 में शुरू हुआ जब ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाया. पोप लियो XIV ने इस कार्रवाई की आलोचना की. फिर अप्रैल 2026 में अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए. पोप ने इसे 'सर्वशक्तिमान होने का भ्रम' बताया और युद्ध को गलत करार दिया. उन्होंने सेंट पीटर बेसिलिका में प्रार्थना सभा में कहा, 'भगवान उन लोगों की प्रार्थनाएं नहीं सुनते जो युद्ध करते हैं.'

ट्रंप ने इसे अपनी नीति पर हमला मानते हुए कहा कि वे ऐसे पोप नहीं चाहते जो ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति दें. 13 अप्रैल 2026 को ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, मुझे नहीं लगता कि वह (पोप) अच्छा काम कर रहे हैं. यह जुर्म जैसा है.' उन्होंने एक AI-जनरेटेड इमेज जनरेट की, जिसमें खुद को जीसस के रूप में दिखाया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. हालांकि, बाद में बैकलैश के बाद डिलीट कर दिया. पोप अल्जीरिया के दौरे पर गए और पत्रकारों से बोले कि वे ट्रंप प्रशासन से नहीं डरते और गॉस्पेल का संदेश देते रहेंगे.

 

ट्रंप ने कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार की इजाजत देने वाले पोप नहीं चाहते
ट्रंप ने कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार की इजाजत देने वाले पोप नहीं चाहते

सवाल 2: इस टकराव का मतलब क्या है और आगे क्या हो सकता है?
जवाब: यह टकराव नैतिक मार्गदर्शन (पोप) और राजनीतिक जिम्मेदारी (राष्ट्रपति) के बीच गहरे तनाव को दिखाता है. अमेरिका जैसे ईसाई बहुल देश में भी यह विवाद इसलिए खास है क्योंकि पोप लियो XIV खुद अमेरिकी हैं. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रंप के शब्दों को अस्वीकार्य बताया. उप-प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने कहा कि पोप शांति के प्रतीक हैं.

इटली के पूर्व प्रधानमंत्री मैटेओ रेंजी ने ट्रंप को 'रिश्ते तोड़ने वाला' बताया. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियन ने भी ट्रंप की आलोचना की. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वेटिकन से कहा कि उन्हें मेटर्स ऑफ मॉरेलिटी तक सीमित रहना चाहिए. कैथोलिक कनेक्ट के लेखक का कहना है कि यह इतिहास की सबसे गलत बहस है. इतिहास बताता है कि ऐसे टकराव ज्यादातर कूटनीति से सुलझ जाते हैं, लेकिन दोनों पक्ष अडिग रहें तो विभाजन बढ़ सकता है. ट्रंप ने माफी नहीं मांगी और पोप शांति का संदेश देते रहेंगे.

 

पोप लियो XIV ने कहा कि वे ट्रंप से नहीं डरते
पोप लियो XIV ने कहा कि वे ट्रंप से नहीं डरते

सवाल 3: अमेरिकी राष्ट्रपतियों और पोप के बीच टकराव का लंबा इतिहास क्या है?
जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपतियों और पोप के बीच टकराव का इतिहास 1919 से शुरू होता है, जब पहली बार कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पोप से मिले थे.

  • 4 जनवरी 1919 को राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन पोप बेनेडिक्ट XV से वेटिकन में मिले. यह पहली बैठक थी. दोनों ने विश्व युद्ध के बाद शांति पर बात की, लेकिन बैठक अजीब तरीके से खत्म हुई. जब पोप ने सबको आशीर्वाद देने के लिए कहा, तो विल्सन (कैथोलिक नहीं थे) खड़े रहे, जबकि कैथोलिक लोग घुटनों पर बैठ गए. यह पहला 'असहज पल' था.
  • राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने वेटिकन के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध बनाने की कोशिश की, लेकिन सीनेट और प्रोटेस्टेंट बहुमत के विरोध के कारण सिर्फ पर्सनल एन्वॉय भेजा.
  • राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने 1951 में वेटिकन के लिए एम्बेसडर नियुक्त करने की कोशिश की, लेकिन प्रोटेस्टेंट समुदाय ने इतना विरोध किया कि नामांकित व्यक्ति ने इस्तीफा दे दिया. यह पहला बड़ा राजनीतिक विवाद था.
  • 1963 में राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी (कैथोलिक) पोप पॉल VI से मिले. यह कैथोलिक राष्ट्रपति और पोप की पहली बैठक थी, लेकिन चुनाव से पहले केनेडी पर 'कैथोलिक होने के कारण वेटिकन का प्रभाव' का आरोप लगाया गया था, जिसका उन्होंने खंडन किया. बैठक अच्छी रही, लेकिन पृष्ठभूमि में तनाव था.
  • 1970 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पोप पॉल VI से मिले. बैठक कम सुखद, बल्कि तीखी बताई गई.
  • 1993 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पोप जॉन पॉल II के बीच गर्भपात और पॉपुलेशन कंट्रोल पर खुला विवाद हुआ. क्लिंटन प्रशासन ने गर्भपात अधिकारों का समर्थन किया, जबकि पोप इसके सख्त खिलाफ थे.
  • राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और पोप जॉन पॉल II के बीच इराक युद्ध और स्टेम सेल रिसर्च पर मतभेद थे. 2004 में पोप ने इराक युद्ध की निंदा की. बुश और पोप बेनेडिक्ट XVI के बीच भी इराक युद्ध, मौत की सजा और गर्भपात पर अलग-अलग रुख रहा.
  • राष्ट्रपति बराक ओबामा और पोप फ्रांसिस के बीच 'गर्भनिरोधक दवाओं का अनिवार्य कवर' पर बड़ा विवाद हुआ. कैथोलिक अस्पतालों और संस्थाओं को इसे देने का विरोध था. 2015 में मुलाकात में दोनों ने गरीबी और असमानता पर सहमति जताई, लेकिन धार्मिक स्वतंत्रता और गर्भपात पर तनाव रहा.
  • 2016 में ट्रंप और पोप फ्रांसिस के बीच भी कहा-सुनी हुई थी. प्रवासन नीति और बॉर्डर वॉल पर विवाद छिड़ा था, लेकिन यह इस स्तर तक नहीं पहुंचा.

सवाल 4: कैसे अमेरिका सबसे बड़ा ईसाई देश होने के बावजूद चर्च के खिलाफ हो जाता है?
जवाब: 2026 तक अमेरिका में करीब 21.3 से 21.7 करोड़ ईसाई रहते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या है. फिर भी यह कभी-कभी पोप या कैथोलिक चर्च की नैतिक सलाह से टकरा जाता है. इसका कारण कोई 'चर्च-विरोध' नहीं, बल्कि अमेरिका की मूल संवैधानिक व्यवस्था है. अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन में साफ लिखा है, 'सरकार किसी धर्म को राज्य-धर्म नहीं बना सकती और न ही किसी धर्म की आजादी पर रोक लगा सकती है.' थॉमस जेफरसन ने 1802 में इसे 'चर्च और राज्य के बीच दीवार' कहा था.

अमेरिका की स्थापना यूरोप से भागे उन लोगों ने की थी जो वहां धर्म के नाम पर उत्पीड़न झेल चुके थे. इसलिए संस्थापकों ने जानबूझकर यह सुनिश्चित किया कि कोई भी धार्मिक संस्था सरकार को निर्देशित न कर सके. राष्ट्रपति संविधान की शपथ लेते हैं, चर्च की नहीं.

विदेश मामलों के जानकार और NEHU प्रोफेसर प्रसेनजीत बिस्वास कहते हैं, 'जब युद्ध, गर्भपात, प्रवासन, समान अधिकार या विदेश नीति जैसे नीतिगत मुद्दे चर्च की नैतिक शिक्षाओं से टकराते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय हित, मतदाताओं की मांग और संवैधानिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हैं. उदाहरण के तौर पर, ट्रंप और पोप लियो XIV के बीच ईरान युद्ध को लेकर जो विवाद चल रहा है, पोप शांति और नैतिकता की बात करते हैं, जबकि ट्रंप अमेरिका फर्स्ट और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं. इससे पहले भी कई मतभेद हो चुके हैं. अमेरिका 'ईसाई बहुल' देश है, लेकिन 'ईसाई राज्य' नहीं. यहां धार्मिक स्वतंत्रता है, लेकिन राज्य धर्मनिरपेक्ष है. यही वजह है कि सबसे बड़ा ईसाई देश होने के बावजूद वह चर्च के नैतिक आदेशों को बाध्यकारी नहीं मानता, बल्कि इसे अपनी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का हिस्सा मानता है.'

69% ईसाई अमेरिका में ट्रंप-पोप लियो XIV का यह विवाद चर्च vs स्टेट की पुरानी कहानी का नया अध्याय है. ईरान युद्ध और वेनेजुएला जैसे मुद्दों पर नैतिकता और सुरक्षा के बीच टकराव हुआ है. इतिहास गवाह है कि ऐसे विवाद सत्ता और नैतिकता के बीच हमेशा से चले आ रहे हैं, लेकिन संवाद से ही समाधान निकलता है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

US- Iran Peace Deal: होर्मुज होगा फ्री! अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बोला UN- 'शांति की दिशा में...'
होर्मुज होगा फ्री! अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बोला UN- 'शांति की दिशा में...'
'किसी तरह का नहीं करेंगे कॉम्प्रोमाइज', क्यों यूएस-ईरान शांति समझौता के खिलाफ खड़ा हुआ इजरायल?
'किसी तरह का नहीं करेंगे कॉम्प्रोमाइज', क्यों यूएस-ईरान शांति समझौता के खिलाफ खड़ा हुआ इजरायल?
यूएस-ईरान डील पर लेबनान को लेकर ऐसा क्या बोले शहबाज शरीफ, इजरायल की हो गई आंखें लाल
यूएस-ईरान डील पर लेबनान को लेकर ऐसा क्या बोले शहबाज शरीफ, इजरायल की हो गई आंखें लाल
‘कई बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी’, US-ईरान समझौते पर साइन होने से पहले जेडी वेंस का बड़ा बयान
‘कई बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी’, US-ईरान समझौते पर साइन होने से पहले जेडी वेंस का बयान
Advertisement

वीडियोज

Bollywood News: धमाल 4 का नया गाना ‘चटनी’ रिलीज, भोजपुरी तड़के और मस्तीभरे अंदाज ने बटोरी सुर्खियां (15.06.26)
New Mercedes S-Class launched at price of 2.20 cr. | #mercedes #mercedessclass #autolive
Kumkum Bhagya फेम Sanchita Ugale का 22 साल की उम्र में निधन, Entertainment Industry में शोक की लहर
Pati Brahmachari: Suraj को सताया डर! क्या Isha को पसंद आएगा केक वाला ये रोमांटिक सरप्राइज?
Vijay Thalapathy और Trisha Krishnan की हुई सीक्रेट सगाई? वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चाएं
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
यूसुफ पठान को हाई कोर्ट से मिला चार हफ्तों का समय, चेतावनी भी दी गई, जानें पूरा मामला
यूसुफ पठान को हाई कोर्ट से मिला चार हफ्तों का समय, चेतावनी भी दी गई, जानें पूरा मामला
ममता बनर्जी से मिलने जा रहे TMC विधायक कुणाल घोष पर युवक ने दे मारा अंडा, वीडियो आया सामने
ममता बनर्जी से मिलने जा रहे TMC विधायक कुणाल घोष पर युवक ने दे मारा अंडा, वीडियो आया सामने
Watch: अकेला वैभव सूर्यवंशी, सामने पूरी श्रीलंका टीम, हुई भयंकर हाथापाई; वीडियो उड़ा देगा होश
अकेला वैभव सूर्यवंशी, सामने पूरी श्रीलंका टीम, हुई भयंकर हाथापाई; वीडियो उड़ा देगा होश
Box office: 2026 की मलयालम फिल्म, जो 'धुरंधर 2' से भी निकली आगे, 10 करोड़ में कमाया 2284 परसेंट का प्रॉफिट
2026 की मलयालम फिल्म, जो 'धुरंधर 2' से भी निकली आगे, 10 करोड़ में कमाया 2284 परसेंट का प्रॉफिट
Explained: 13 अमेरिकी तो 1508 ईरानी सैनिकों की मौत, 27 लाख बेघर और 1.12 ट्रिलियन डॉलर खर्च! जंग में नुकसान कितना?
13 अमेरिकी तो 1508 ईरानी सैनिकों की मौत और 1.12 ट्रिलियन डॉलर खर्च! जंग में किसका नुकसान कितना?
इधर यूएस-ईरान में डील का ऐलान, उधर भारत सरकार का LPG और पेट्रोल को लेकर आ गया बड़ा बयान
इधर यूएस-ईरान में डील का ऐलान, उधर भारत सरकार का LPG और पेट्रोल को लेकर आ गया बड़ा बयान
ईरान-अमेरिका के शांति समझौते पर आया चीन का पहला बयान, बोला- 'हमें उम्मीद है कि...'
ईरान-अमेरिका के शांति समझौते पर आया चीन का पहला बयान, बोला- 'हमें उम्मीद है कि...'
Farmer Invest in Stock Market: क्या शेयर बाजार में पैसा लगा सकते हैं गांव के किसान, जानें कैसे करें शुरुआत?
क्या शेयर बाजार में पैसा लगा सकते हैं गांव के किसान, जानें कैसे करें शुरुआत?
Embed widget