Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने बदल दिया पेंटागन का नाम, अब हो गया डिपार्टमेंट ऑफ वॉर... आखिर US राष्ट्रपति ने क्यों किया ऐसा?
US Defense Department Name Change: 1789 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के तुरंत बाद से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद तक पेंटागन का नाम डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ही थी, जिसे ट्रंप ने फिर से कर दिया है.

अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट का हेडक्वार्टर का नाम अब बदल गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने अब पेंटागन का नाम बदलकर डिपार्टमेंट ऑफ वॉर कर दिया है यानी अब ये युद्ध विभाग कहलाएगा. ट्रंप ने शुक्रवार (5 सितंबर, 2025 ) को कार्यकारी आदेश पर साइन कर दिए हैंं. उन्होंने कहा कि इसने दुनिया को 'विजय का संदेश' भेजा है.
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि यह जीत का संदेश देता है, दुनिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह नाम कहीं ज़्यादा उपयुक्त है.' हालांकि ट्रंप कांग्रेस की मंजूरी के बिना पेंटागन का नाम औपचारिक रूप से नहीं बदल सकते, लेकिन उनके आदेश में युद्ध विभाग को द्वितीयक पद के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है.
न्यूज़ एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप का ये नाम रखना असल में युद्ध विभाग की याद दिलाता है. 1789 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के तुरंत बाद से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद तक, करीब यह उपाधि 150 से ज़्यादा सालों तक इस्तेमाल की जाती रही.
क्या था युद्ध विभाग?
युद्ध विभाग तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन द्वारा बनाया गया था. पेंटागन के एक आधिकारिक इतिहास वेब पेज के अनुसार, यह अमेरिकी सेना, नौसेना और मरीन कॉर्प्स की देखरेख करता था, लेकिन एक दशक बाद नौसेना और मरीन अलग हो गए. वर्तमान रक्षा विभाग में सेना, नौसेना, मरीन कोर, वायु सेना और हाल ही में अंतरिक्ष बल शामिल हुआ है, जिनमें से सभी का इतिहास मूल युद्ध विभाग से अलग है.
ट्रंप ने क्यों बदला नाम?
ऐसा लग रहा था जैसे ट्रंप प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों में जीत के बाद से अमेरिका की सैन्य नाकामियों के लिए उसे रक्षा विभाग कहने के अपने फैसले को ज़िम्मेदार ठहरा रहे थे. उन्होंने कहा, 'हम हर युद्ध जीत सकते थे, लेकिन हमने वास्तव में बहुत ज़्यादा राजनीतिक रूप से सही या जागरूक रहना चुना.'
यह रीब्रांडिंग ट्रंप द्वारा अपने दूसरे कार्यकाल में देश और विदेश में अपनी शक्ति और सामर्थ्य का प्रदर्शन करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जो उनकी मेक अमेरिका ग्रेट अगैन नीति का हिस्सा है. ट्रंप ने पहले शिकायत की थी कि मौजूदा नाम बहुत ज़्यादा 'रक्षात्मक' है. उन्होंने कहा, 'मैं सिर्फ रक्षा नहीं करना चाहता. मैं रक्षा तो चाहता हूं, लेकिन मैं आक्रामक भी बनना चाहता हूं.'
ये भी पढ़ें- भारत दौरे पर आएंगे मॉरीशस के प्रधानमंत्री, पहली द्विपक्षीय यात्रा में कई मुद्दों पर होगी बातचीत
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL





















