ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंका ने न सिर्फ तेहरान बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की भी नींद उड़ा रखी है. अमेरिका की इस धमकी से सऊदी अरब, कतर समेत अन्य देश भी चिंता में हैं. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पिछले कुछ दिनों से इसको लेकर बयानबाजी भी कम हुई है. लेकिन हमले का खतरा अभी कम नहीं हुआ है. यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अब मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा में हुआ है कि जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश कैरियर ग्रुप भी इस क्षेत्र की ओर ही बढ़ रहा है. पिछली बार पेंटांगन ने इतनी भारी तैनाती का आदेश दिया था, तो वेनेजुएला के राष्ट्राध्यक्ष निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अरेस्ट किया गया था. इलाके में अमेरिकी हमले ने अशांति फैला दी है. 

Continues below advertisement

खाड़ी के तेल उत्पादक देशों ने जारी की चेतावनी

इधर, खाड़ी के तेल उत्पादक देशों ने चेतावनी जारी की है. इसमें तनाव बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो सकता है. यह दुनिया के लिए तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण पॉइंट है. इससे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है. इससे वैश्विक बाजारों को बड़ा झटका लग सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाड़ी तेल आपूर्ति में कमी की वजह से चीन जैसे देश अन्य विकल्प की तलाश कर सकते हैं. ईरान की सीमा से लगे देशों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. 

Continues below advertisement

क्या पाकिस्तान पर किसी तरह का खतरा है? पूर्व राजनयिक और राजनीतिक एक्सपर्ट्स मलीहा लोधी ने AFP को बताया कि ईरान पर किसी भी तरह का अमेरिकी सैन्य हमला पूरे इलाके के लिए खतरनाक और अस्थिरता पैदा करने वाला हो सकता है. खासकर पाकिस्तान पर इसका गहरा असर पर सकता है, इसके परिणाम भी गंभीर हो सकते हैं. इससे बलूचिस्तान में आतंकवादियों को मजबूती मिलेगी. पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है. पाकिस्तान अमेरिका से करीबी तो बढ़ा रहा है, लेकिन ईरान पर होने वाले संभावित हमले का विरोध भी कर रहा है. 

ईरान पर हमले से पाकिस्तान की क्यों बढ़ी चिंता?इसके पीछे वजह है कि दोनों देशों में 900 किमी की बॉर्डर साझा होती है. यह बलूच उग्रवाद के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह है. ईरान का बलूच-सिस्तान प्रांत जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान की सीमा से लगा हुआ है. पाकिस्तान का आरोप है कि बलूच लिबरेशन आर्मी और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट जैसे आतंकवादी समूहों के गुट सीमा पार हैं. इससे आतंकवादियों को पाकिस्तान सुरक्षाबलों पर बिना किसी डर के हमला करने की अनुमति मिलती है.

पाकिस्तान का बूलचिस्तान प्रांत जैश अल-दल और अंसार अल-फुरकान जैसे ईरान विरोधी मिलिशिया के लिए सुरक्षित ठिकाना है. यह अक्सर ईरानी सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं. इससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच आविश्वास और टकराव बना रहता है. दोनों एक दूसरे पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाते हैं.

यह तनाव जनवरी 2024 में भी देखने को मिला था. इस दौरान ईरान ने पाकिस्तान के पंजगुर जिले में जैश अल-अदल ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए थे. इसमें बीएलए और बीएलफ के ठिकानों पर हमले किए गए थे. बाद में दोनों देशों ने शांति बहाल की थी. 2025 में पाकिस्तान दौरे पर दोनों देशों ने भाईचारे को दोहराते हुए 12 समझौतों पर साइन भी किया था.

हालांकि, ईरान पर संभावित हमला पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है. पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते इस तनाव में बीच में आ सकते हैं. अमेरिका ईरान पर हमला करने के लिए पाकिस्तान की सैन्य सुविधाओं और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है. इससे दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो सकते हैं.