अमेरिका का B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस दुनिया के सबसे फेसम और पावरफुल बॉम्बर एयरक्राफ्ट में गिना जाता है. यह एयरक्राफ्ट अमेरिकी वायुसेना के सबसे पुराने ऑपरेशनल विमानों में शामिल है. इसे अमेरिकी कंपनी बोइंग ने तैयार किया था और पहली बार साल 1955 में अमेरिकी वायुसेना में शामिल किया गया था. यह एक लंबी दूरी तक हमला करने वाला भारी बॉम्बर एयरक्राफ्ट है, जिसमें आमतौर पर 5 क्रू मेंबर तैनात होते हैं. B-52H एक बार में करीब 70,000 पाउंड तक बम, मिसाइल और दूसरे तरह के वेपन ले जाने की क्षमता रखता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लंबी दूरी तक उड़ान भरकर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला कर सकता है.

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बोइंग ने साल 1962 में B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन बंद कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी अमेरिकी वायुसेना ने कई मॉर्डन प्रोग्राम के जरिए इस एयरक्राफ्ट को लगातार अपग्रेड किया है. नए सिस्टम, मॉर्डन इलेक्ट्रॉनिक्स और बेहतर टेक्निक के कारण यह एयरक्राफ्ट आज भी सर्विस में बना हुआ है. मौजूदा वक्त में अमेरिकी वायुसेना B-52H वर्जन का इस्तेमाल कर रही है. हाल के सालों में अमेरिका के कई सैन्य अभियानों में इस विमान की अहम भूमिका रही है. यह पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ परमाणु बम और परमाणु क्षमता वाली क्रूज मिसाइलें भी ले जा सकता है, जिससे इसकी रणनीतिक ताकत और बढ़ जाती है.

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B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस की लागत

इस विमान को उड़ाने और ऑपरेट करने की लागत भी काफी अधिक है. B-52H की ऑपरेटिंग कॉस्ट करीब 70,000 डॉलर प्रति घंटा बताई जाती है. इसके मुकाबले अमेरिकी B-2A बॉम्बर की लागत लगभग 1.60 लाख डॉलर प्रति घंटा है, इसलिए B-52H को अपेक्षाकृत कम खर्चीला रणनीतिक बॉम्बर माना जाता है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी वायुसेना ने हाल ही में B-52 के लिए एक नया मॉडिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किया है. इस परियोजना में नए इंजन और आधुनिक तकनीक जोड़ी जा रही है. इस अपग्रेड कार्यक्रम की अनुमानित लागत करीब 48.6 बिलियन डॉलर बताई गई है.

B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस की कीमत

हाल में दुर्घटनाग्रस्त हुआ विमान भी B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस ही था. इसकी मौजूदा कीमत का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अमेरिकी वायुसेना के 2012 के आंकड़ों के अनुसार एक B-52H विमान की कीमत लगभग 84 मिलियन डॉलर थी.  द एविएशन गीक क्लब की रिपोर्ट के मुताबिक B-52H बॉम्बर को एक घंटे के लिए चलाने में लगभग 69708 अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है, जो भारतीय रुपये में 65 लाख 87 हजार होता है. अमेरिकी वायुसेना का मानना है कि लगातार हो रहे आधुनिकीकरण के बाद B-52 विमान वर्ष 2050 तक सेवा में बने रह सकते हैं. यह विमान पहले भी ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म, इराक और सीरिया जैसे कई बड़े सैन्य अभियानों में अपनी प्रभावी भूमिका निभा चुका है. आज भी इसे अमेरिका की रणनीतिक सैन्य शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

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