पेरिस समझौते को अपनाए जाने के 10 साल बाद संयुक्त राष्ट्र की एक नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि देश ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में प्रगति तो कर रहे हैं लेकिन यह गति जलवायु परिवर्तन के सबसे बुरे प्रभावों से बचने के लिए पर्याप्त नहीं है.

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संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन की ओर से मंगलवार (28 अक्टूबर, 2025) को जारी ‘2025 नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशंस (NDC) सिंथेसिस रिपोर्ट’ के अनुसार, जनवरी 2024 से सितंबर 2025 के बीच जमा की गईं 64 नयी राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं से 2035 तक 2019 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन में लगभग 17 प्रतिशत की कमी आएगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वास्तविक और बढ़ती प्रगति है लेकिन अब भी तेज और गहरी उत्सर्जन कटौती के लिए ‘‘बड़ी तेजी’’ की जरूरत है, ताकि मजबूत जलवायु कार्रवाई के लाभ सभी देशों और लोगों तक पहुंच सकें. पेरिस समझौते के तहत प्रत्येक देश अपनी एनडीसी यानी जलवायु कार्रवाई योजना बनाते हैं, जिसमें उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपाय तय किए जाते हैं.

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रिपोर्ट बताती है कि 90 प्रतिशत से अधिक देश 10 फरवरी 2025 की एनडीसी जमा करने की समयसीमा चूक गए. एनडीसी जमा करने वाले 64 देशों में अमेरिका, रूस, जापान, ब्राजील, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और नाइजीरिया हैं, जबकि चीन, भारत, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, ईरान और सऊदी अरब ने अभी अपनी योजनाएं जमा नहीं की हैं.

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि यह आंकड़ा प्रगति और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता दोनों को दर्शाता है. उन्होंने कहा, 'दस साल बाद हम कह सकते हैं कि पेरिस समझौता वास्तविक प्रगति दे रहा है, लेकिन इसे और तेज तथा न्यायपूर्ण बनना होगा.'

रिपोर्ट में कहा गया है कि 70 प्रतिशत देशों ने अपने नए एनडीसी में न्यायोचित परिवर्तन पर विचार किया है, जिसमें जलवायु कार्रवाई को सामाजिक संरक्षण और आजीविका से जोड़ा गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक तापमान औद्योगिक युग से अब तक 1.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और 1.5° डिग्री सेल्सियस की सीमा में रहने के लिए उत्सर्जन को 2035 तक 57 प्रतिशत तक घटाना आवश्यक है, जो अब और भी कठिन हो गया है.