ईरान ने ट्रंप की आर्थिक नाकेबंदी को लेकर पलटवार करते हुए अमेरिका को उसी की आर्थिक स्थिति को लेकर आईना दिखाया है. ईरान ने दो टूक कहा है कि यह सिर्फ अपने संकट को छुपाने की कोशिश और उससे ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अपने बयान में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला दिया है. 

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एक्स पर पोस्ट करते हुए, अराघची ने कहा, 'तथाकथित "इकोनॉमिक D-डे" असल में अमेरिका के अपने संकट, जिसमें बेहिसाब कर्ज और तेजी से बढ़ते ब्याज के खर्च से शामिल है, से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है. नाकाम नीतियों पर और जोर देने से सिर्फ और हार ही मिलेगी और ईरानियों की दुश्मनी भी मोल लेनी पड़ेगी. अमेरिका का आर्थिक आतंकवाद (Economic  Terrorism) दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और संप्रभुता के लिए खतरा है.

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि हार के बाद अमेरिका अपने सहयोगियों से मदद की भीख मांग रहा है. 

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अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन के पार

इससे पहले न्यूज एजेंसी  रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है. यह स्थिति लंबे समय तक बनाए रखने के लायक नहीं है. इसकी वजह सलाना ब्याज का खर्च अब सैन्य खर्च से भी ज्यादा हो गया है.

अमेरिका ने इकोनॉमिक डी डे नाम से ईरान पर लगाया बैन, जानें क्या है? 

दरअसल, पूरा विवाद उस फैसले को लेकर है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अबतक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई की घोषणा की है. इसे उन्होंने इकोनॉमिक डी-डे नाम दिया है. इसके तहत अमेरिका ने दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भी देश या वित्तीय संस्थान ईरान को मदद करेगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे. अमेरिका का कहना है कि इसके जरिए ईरान के तेल व्यापार, नकदी ट्रांसफर, फर्जी कंपनियों और फाइनेंशियल नेटवर्क को पूरी तरह से बैन करना और अलग-थलग करना है.