इंडोनेशिया के रुटेंग के पास 5.7 तीव्रता का भूकंप आया. USGS के अनुसार, भूकंप का केंद्र रुटेंग से लगभग 32 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पूर्व (NNE) में 10 किमी की गहराई पर था. पश्चिमी इंडोनेशियाई समय के अनुसार, ईस्ट नूसा तेंगारा क्षेत्र में बुधवार रात भूकंप के झटके लगातार महसूस किए गए. हालांकि भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया गया है.
चार जिलों में महसूस किए गए झटके
भूकंप के झटके मंगगराई रीजेंसी, पश्चिमी मंगगराई रीजेंसी, नागेकेओ रीजेंसी और पूर्वी सुम्बा रीजेंसी में महसूस किए गए. भूकंप के झटकों की तीव्रता इतनी थी कि इससे लोगों को कंपन महसूस हुआ और घरों में रखी वस्तुओं के हिलने जैसी स्थिति बनी.
2 से 4 तीव्रता वाले भूकंप भी लगातार आ रहे
इस बीच क्षेत्र में 5.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप भी लगातार दर्ज किए जा रहे हैं. इनकी तीव्रता 4.0 से लेकर 2.0 तक रही है. फ्लोरेस बैक-आर्क टेक्टोनिक जोन में लगातार आफ्टरशॉक आने के कारण फ्लोरेस द्वीप और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद जारी हैं आफ्टरशॉक
मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) प्रमुख तेुकु फैसल फतहानी के अनुसार, फ्लोरेस में आए 7.7 तीव्रता के बड़े भूकंप के बाद आफ्टरशॉक की गतिविधियां सामान्य होने में करीब तीन से चार सप्ताह लग सकते हैं.
उन्होंने बुधवार को जकार्ता में कहा कि भूकंप काफी बड़ा था और इसकी तीव्रता 7.7 थी. ऐसे में इसके बाद आने वाले झटकों की गतिविधि कम होने में लगभग तीन से चार सप्ताह का समय लग सकता है.
अब तक 3,055 आफ्टरशॉक दर्ज
BMKG के मुताबिक, बुधवार 19 अगस्त 2026 को शाम पांच बजे तक कुल 3,055 आफ्टरशॉक दर्ज किए जा चुके थे. इनमें सबसे अधिक तीव्रता का आफ्टरशॉक 6.2 का था, जबकि सबसे कम तीव्रता 1.1 दर्ज की गई. कुल आफ्टरशॉक में से 88 झटके ऐसे थे, जिन्हें लोगों ने महसूस किया.
फतहानी ने बताया कि 19 अगस्त को शाम पांच बजे तक दर्ज किए गए आफ्टरशॉक की संख्या 3,055 हो चुकी थी.
क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की सलाह
BMKG भूकंपीय गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है. एजेंसी प्रभावित इलाकों और राहत एवं निकासी केंद्रों में मौजूद लोगों को भी समय-समय पर जानकारी दे रही है.
BMKG ने लोगों से अपील की है कि जिन घरों या इमारतों की संरचना में भूकंप के कारण दरारें आ गई हैं और जिन्हें असुरक्षित माना गया है, उनमें वापस न जाएं. आफ्टरशॉक के दौरान ऐसी इमारतों के गिरने का खतरा हो सकता है.
