ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि जब वह और तेहरान एक दूसरे अधिकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ से बातचीत कर रहे थे, तब माहौल बेहद ही तनावपूर्ण था. 

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उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान उन्होंने विटकॉफ से पूछा कि क्या वह कभी ऐसी बातचीत में शामिल हुए हैं? जहां किसी भी पल बमबारी होने का खतरा हो. यह साफ नहीं था कि वह बातचीत के किस हिस्से या जगह की बात कर रहे थे.

अराघची कहते हैं कि ईरान अमेरिका की धमकियों से डरा नहीं. यह वेनेजुएला नहीं है, जहां आप एक व्यक्ति को पकड़ते हैं. बाकी सब डरकर पीछे हट जाते हैं. 

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इस संपर्क को औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता: ईरान 

अराघची और विटकॉफ के बीच बातचीत परमाणु वार्ता के दौरान शुरू हुई थी. तब से अबतक कई दौर की बातचीत चल रही है. तेहरान का कहना है कि इस संपर्क को औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता. ईरानी मीडिया मेहर न्यूज को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि तेहरान वेनेजुएला की तरह घुटने नहीं टेकेगा. दक्षिण अमेरिकी देश में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिकी सैन्य अभियान का जिक्र किया है. 

पिछले साल बातचीत शुरू होने के बाद से अराघची और विटकॉफ के बीच संपर्क कई राजधानियों में हुआ है. पहला दौर 6 फरवरी को मस्कट में अप्रत्यक्ष रूप से हुआ. इसमें ओमान के मध्यस्थ दोनों प्रतिनिधमंडलों के बीच आते जाते रहे दिन के अंत में एक संक्षिप्त आमने सामने की बैठक हुई. इसके बाद मस्कट और रोम में तीन और दौर हुए हैं. पांचवा दौर यूरोप में होना था. बाद में दोनों की मुलाकात जिनेवा में हुई है. फिर युद्ध शुरू हो गया. अप्रैल में अराघची ने पाकिस्तान अधिकारियों की मध्यस्थता में विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ एक बैठक के लिए इस्लामाबाद, मस्क और मॉस्को की यात्रा की. इन औपचारिक दौरों के अलावा दोनों ने सीधे टेक्सट मैसेज को एक पैरलल चैनल भी बनाए रखा. 

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