कौन है नूर वली महसूद, जो बना पाकिस्तान का दुश्मन नंबर-1? जानें तालिबान से क्या है कनेक्शन
Tehreek-e-Taliban Pakistan: नूर वली महसूद ने साल 2018 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की कमान संभाली थी. जिसके बाद उसने संगठन में कई प्रकार के बदलाव भी किए.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल में सीमा पर भड़की हिंसा दोनों पड़ोसी देशों के बीच सबसे गंभीर झड़प मानी जा रही है. इन दोनों देशों के संघर्ष के पीछे एक बड़ा कारण अफगानिस्तान में कुख्यात आतंकवादी सरगना नूर वली महसूद की मौजूदगी है, जिस पर इस्लामाबाद अपने देश में लगभग रोज होने वाले हमले का नेतृत्व करने का आरोप लगाता है.
हालांकि, बुधवार (15 अक्टूबर, 2025) को दोनों देशों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन नूर वली महसूद की अफगानिस्तान में मौजूदगी को लेकर पाकिस्तान की नाराजगी अभी भी बरकरार है, जो अपने शीर्ष सहयोगियों के साथ वहां पनाह लिए हुए है.
काबुल में नूर वली महसूद को किया गया था टार्गेट
पिछले हफ्ते काबुल में एक हवाई हमले में एक बख्तरबंद टोयोटा लैंड क्रूजर को निशाना बनाया गया था, जिसमें पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक नूर वली महसूद सवार था. हालांकि, आतंकवादियों और पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि वह इस हमले में बच गया. इसके बाद संगठन ने एक ऑडियो जारी किया, जिसे कथित तौर पर महसूद का बताया जा रहा है.
पाकिस्तान ने इस हवाई हमले की आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली है. यह हमला 2022 में अलकायदा नेता अयमान अल-जवाहिरी को अमेरिका की ओर से निशाना बनाए जाने के बाद काबुल में पहला एयरस्ट्राइक माना जा रहा है.
इस बीच अफगानिस्तान के तालिबान शासन ने पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देने के आरोपों से इनकार किया है और इसके विपरीत इस्लामाबाद पर इस्लामिक स्टेट के स्थानीय गुट को शरण देने का आरोप लगाया है, जो उसका मुख्य सशस्त्र प्रतिद्वंद्वी है.
2018 में नूर वली महसूद ने संभाली टीटीपी का कमान
नूर वली महसूद ने साल 2018 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की कमान संभाली थी. महसूद के पहले संगठन के तीन पूर्ववर्ती नेताओं को अमेरिकी ड्रोन हमलों में मार दिया गया था. तब तक पाकिस्तानी सेना के अभियानों ने इस संगठन को उसके ठिकानों से खदेड़कर अफगानिस्तान की ओर धकेल दिया था.
महसूद ने संगठन की कमान संभालने के बाद न सिर्फ पुनर्जीवित किया बल्कि उसकी रणनीति में बदलाव कर आपस में लड़ने वाले गुटों को कूटनीतिक स्किल से एकजुट भी किया. महसूद एक धार्मिक स्कॉलर के रूप में प्रशिक्षित है, जिसने वैचारिक मोर्चे पर भी कमान संभाली.
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Source: IOCL






















