मिडिल ईस्ट में फिर से जंग भड़कने और स्ट्रेट ऑफ होर्मज में जहाजों पर हो रहे हमल एक बार फिर दुनियाभर में तेल संकट की ओर इशारा कर रहा है. इस बीच ईरान के बुशहर और बंदर अब्बास शहर के पास धमाके हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज में ईरान के खिलाफ नाकेबंदी बहाल करने और जहाजों से शुल्क वसूलने के ऐलान के बाद ईरान भी हमलावर है. इस बीच ईरान की सेना ने दो टूक कहा है कि अमेरिका की धमकी या सैन्य कार्रवाई से होर्मुज कभी नहीं खुलेगा.

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ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी ईरान में स्थित बुशहर (जहां परमाणु सुविधाएं मौजूद हैं) में चार स्थानों पर अमेरिकी मिसाइलों से हमला किया गया है. इससे पहले ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बताया था कि दक्षिणी शहर बंदर अब्बास के पास कम से कम पांच धमाकों की आवाज सुनी गई थी.

तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कभी भी जंग, अमेरिका की दादागिरी और सैन्य कार्रवाई से नहीं खुलेगा. उन्होंने कहा कि हमारी सेना होर्मजु से पीछे नहीं हटेगी. मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि होर्मुज खोलने के एकमात्र रास्ता है कि ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करना होगा. उन्होंने दो टूक कहा कि हम शहीदों और खासकर इस्लामिक क्रांति के शहीद नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खून का बदला लेकर रहेंगे.

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ट्रंप ने होर्मुज में अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद सोमवार (13 जुलाई 2026) को बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका होर्मुज में ईरान के खिलाफ नाकेबंदी बहाल कर रहा है और वह सुरक्षित आवाजाही के लिए जहाजों से शुल्क वसूलेगा.' ओमान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर ईरान के हमले में मंगलवार को चालक दल के एक भारतीय सदस्य की मौत हो गई जबकि छह भारतीयों समेत आठ अन्य लोग घायल हो गए.

भारत ने इस हमले की निंदा की. विदेश मंत्रालय ने ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया. भारत ने कहा कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने के दौरान ‘एमटी अल बहियाह’ और 'एमटी मोम्बासा' नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है.