कौन हैं बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलीलुर रहमान? जिन्हें टेक्नौक्रेट कोटा से कैबिनेट में मिली एंट्री; युनूस सरकार में निभा चुके ये जिम्मेदारी
मोहम्मद युनूस सरकार में NSA डॉ. खलीलुर रहमान को टेक्नौक्रेट कोटा से मंत्री बनाया है. उन्हें विदेश मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. रहमान पेशे से मेडिकल डॉक्टर और एक रिटायर्ड डिप्लोमेट रह चुके हैं.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान ने बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है. उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में मोहम्मद युनूस सरकार में NSA डॉ. खलीलुर रहमान को टेक्नौक्रेट कोटा से मंत्री बनाया है. उन्हें बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आइए जानते हैं, कौन हैं, खलीलुर रहमान?
खलीलुर रहमान की लाइफ से जुड़ी अहम जानकारी
खलीलुर रहमान एक बांग्लादेश रिटायर्ड डिप्लोमेट के तौर पर जाने जाते हैं. वह कनाडा में बांग्लादेश के हाई कमिश्ननर रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने विदेश मंत्रालय में कोरोनाकाल के समय पूर्व चीफ कोऑर्डिनेटर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी.
वह पेशे से एक मेडिकल डॉक्टर भी हैं. उन्होंने इकोले नेशनेल एडमिनिस्ट्रेशन से एमए और सोरबोन यूनिवर्सिटी से एमफिल की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा जेएनयू से पब्लिक हेल्थ में पीएचडी की डिग्री हासिल की है. साल 1985 में वह फॉरेन सर्विस कैडर के तौर पर बांग्लादेश सिविल सर्विस में शामिल हुए थे. इसके अलावा वह वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन में भी काम कर चुके हैं.
इन्हें मिली बांग्लादेश मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारी
बांग्लादेश में बने नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपने मंत्रिमंडल में रहमान के अलावा, सलाहुद्दीन अहमद को गृहमंत्री बनाया है. डॉ अमीर खसरू महमूद को वित्त और प्लानिंग मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही शमा ओबैद को विदेश राज्यमंत्री का पद सौंपा गया है. इनके अलावा तारिक रहमान की कैबिनेट में एकमात्र हिंदू नेता निताई रॉय चौधरी को जगह मिली है .
बीएनपी ने बंपर जीत हासिल कर सत्ता संभाली
बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच हुए चुनाव में बीएनपी ने बड़े मार्जिन से जीत हासिल की है. यहां 297 सीटों पर चुनाव हुए थे, इनमें बीएनपी को 209 सीटें मिली तो वहीं जमात-ए-इस्लामी सिर्फ 68 सीटों पर जीत हासिल कर सकी. इस चुनाव में शेख हसीना की आवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई थी. इनके अलावा 4 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने भी इस चुनाव में जीत हासिल की है.
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