सऊदी अरब में तेल का अकूत भंडार है और सबसे ज्यादा काला सोना पैदा करता है. ऐसे में अब सऊदी अरब की सरकार को डर सता रहा है कि तेल का भंडार खत्म हो सकता है, इसलिए सऊदी सरकार खरबों डॉलर खर्च कर नियोम शहर को बसा रही है. इसके लिए सऊदी सरकार ने विजन 2030 बनाया है और इसी के तहत एक ऐसे शहर को बसाया जा रहा है, जो पर्यटकों और अरबपतियों के लिए स्वर्ग जैसा हो. इस शहर का नाम है नियोम. सरकार द्वारा रेगिस्तान में कृत्रिम बर्फ भी बनाई जा रही है.

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हालांकि जैसा सऊदी सरकार ने सोचा था वैसा होता फिलहाल नहीं दिख रहा है, क्योंकि साल 2016 में दुनिया के सामने आया नियोम शहर अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. इस 100 मील लंबे शहर को बनाने में 2 ट्रिलियन डॉलर का भारी भरकम खर्च आ रहा है. इसी वजह से सऊदी अब अपने कदम पीछे खींच रहा है. 

क्यों बदलनी पड़ी सऊदी को अपनी प्राथमिकता ?सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान देश की अर्थव्यवस्था को तेल से हटाकर अब पर्यटन और उद्योग पर ले जाना चाहते हैं. इसी वजह से सऊदी में गीगा प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं. हालांकि अब सऊदी सरकार ने अपनी प्राथमिकता को बदल दिया है. सऊदी अरब के एक अधिकारी के मुताबिक, हमने बहुत ज्यादा खर्च कर दिया है. उन्होंने कहा कि हम हर घंटे 100 मील दौड़े, लेकिन अब हम घाटे में चल रहे हैं. इसलिए हमें अब अपनी प्राथमिकता को फिर से बदलना होगा. 

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90 लाख रईसों को बसाने की थी योजनासऊदी की प्रिंस सरकार लाल सागर से सटे अपने इलाके को पर्यटन के लिए स्वर्ग के रूप में विकसित करना चाहती थी. नियोम शहर में लगभग 90 लाख लोगों को बसाने की योजना थी. नियोम शहर के टावर को समुद्र स्तर से 500 मीटर ऊपर बनाया जाना है. ये 200 मीटर चौड़ा और 170 किमी लंबा बनाया जाना था. हालांकि कई साल बीत जाने के बाद भी इसमें बहुत ज्यादा देरी हुई है.

दरअसल प्रिंस सरकार ने जब नियोम को बसाने का सपना देखा था तब तेल के दाम 100 डॉलर थे, लेकिन अब ये 60 डॉलर के आस-पास हैं. इससे सऊदी की कमाई पर काफी असर पड़ा है और इसी के चलते उन्हें अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा है.

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