Hormuz Strait: ट्रंप की नाकेबंदी वाली चाल से खुश नहीं सऊदी अरब, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कर दी ये डिमांड
Hormuz Strait: ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जिससे खाड़ी देशों से तेल की बिक्री पर बहुत ज्यादा असर पड़ रहा है.

पाकिस्तान में शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने ईरान के होर्मुज स्ट्रेट समेत सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है. हालांकि इससे अमेरिका के सहयोगी देश सऊदी अरब को इस बात की चिंता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ये फैसला मिडिल ईस्ट में हालात और ज्यादा बिगाड़ सकता है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, रियाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी हटाने और बातचीत की मेज पर लौटने के लिए दबाव डाल रहा है. अरब अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन को बताया कि सऊदी अरब को डर है कि ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों को बंद करने से तेहरान में तनाव बढ़ सकता है और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में बाधा उत्पन्न हो सकती है.'
अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से ईरान के सभी जहाजों के आने-जाने पर रोक लगाने का फैसला ईरान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन सऊदी अरब ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान लाल सागर में स्थित बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandab Strait) जलमार्ग को बंद करके जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जो सऊदी अरब के शेष तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है.
खाड़ी देशों की चिंताएं क्या है?
करीब डेढ़ महीने से चल रहे युद्ध के दौरान ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जिससे खाड़ी देशों से तेल की बिक्री पर बहुत ज्यादा असर पड़ रहा है, इतना ही नहीं ईरान ने खाड़ी देशों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन भी दागे, जिससे उनके बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है.
कई हफ्तों की रुकावटों के बाद सऊदी अरब ने रेगिस्तान के पार पाइपलाइन के जरिए लाल सागर तक कच्चे तेल की आपूर्ति करके अपने तेल निर्यात को युद्ध से पहले के हालात यानी लगभग सात मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने में कामयाबी हासिल की, जबकि ईरान की होर्मुज नाकाबंदी जारी रही. वाशिंगटन जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रियाद को चिंता है कि अगर लाल सागर का निकास मार्ग भी बंद हो गया तो ये आपूर्ति खतरे में पड़ जाएगी.
दरअसल अरब सागर-लाल सागर को जोड़ने वाला बाब अल-मंडेब लंबे समय से ईरान के सहयोगी हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है. हूती विद्रोहियों ने गाजा पट्टी में युद्ध के दौरान इस समुद्री रास्ते को बुरी तरह बाधित किया था और अब ईरान इस गुट पर दबाव डाल रहा है कि वह इस मार्ग को फिर से बंद कर दे.
यमन मामलों के जानकार और वाशिंगटन स्थित नीति संस्थान न्यू अमेरिका के फेलो एडम बैरन ने WSJ को बताया कि अगर ईरान बाब अल-मंडेब को बंद करना चाहता है तो हूती इसके लिए सबसे उपयुक्त सहयोगी हैं और गाजा संघर्ष पर उनकी प्रतिक्रिया से पता चलता है कि उनमें ऐसा करने की क्षमता है.
ईरान ने भी दी बाब-अल-मंडेब को लेकर चेतावनी
ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी, जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के करीबी है ने रिपोर्ट किया है कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी के कारण देश लाल सागर के प्रवेश द्वार को बंद कर सकता है. सोमवार को ईरान ने अपने पड़ोसियों की समुद्री सुरक्षा के खिलाफ भी धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका उसके जहाजरानी मार्गों को अवरुद्ध करता है तो वो इस पर फैसला ले सकता है.
आईआरआईबी के मुताबिक, ईरान के सशस्त्र बलों ने कहा, 'यदि फारस की खाड़ी और ओमान सागर में ईरान के बंदरगाहों की सुरक्षा को खतरा है तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा.'
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Source: IOCL
























