अमेरिका-ईरान जंग थमने के बाद अब स्थिति सामान्य होने लगी है, क्योंकि कच्चे तेल के दाम गिरकर 72 डॉलर प्रति डॉलर पर आ गए हैं. इसी बीच एक और अच्छी खबर आई है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब ने अगस्त महीने के लिए एशियाई देशों को दिए जाने वाले तेल में पिछले 26 सालों की सबसे बड़ी कटौती कर दी है. कच्चे तेल के दाम में कटौती को भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम घटने की उम्मीद है.

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने अगस्त से एशिया के लिए कच्चे तेल की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती करने का फैसला लिया है. इसका मतलब है कि अरब लाइट क्रूड क्षेत्रीय बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल डिस्काउंट पर उपलब्ध होगा. 

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भारत अपनी तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब से इंपोर्ट करता है. ऐसे में इसे भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी राहत वाली खबर माना जा रहा है. हालांकि ग्लोबल मार्केट में मिड जून से ही कच्चे तेल की कीमतें नरम हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत अब घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, जो कि इस साल फरवरी के अंत के स्तर के आसपास है.

सस्ते तेल के अब कईं विकल्प मौजूद बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म होने के बाद अब होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है. युद्ध के कारण यह बंद थी. होर्मुज खुलते ही तेल कंपनी सऊदी अरामको ने रास तनुरा बंदरगाह से कच्चे तेल की शिपमेंट को तेजी से बढ़ाकर युद्ध के पहले के स्तर के 90 फीसदी तक पहुंचा दिया है. होर्मुज बंद होने के कारण कंपनी को अपना माल लाल सागर के यानबू बंदरगाह के रास्ते भेजना पड़ रहा था, तब लागत काफी बढ़ रही थी. हालांकि अब तेल सप्लाई सामान्य होने के कारण सस्ते तेल के कईं विकल्प मौजूद हैं.

इन सबके अलावा सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व वाले OPEC प्लस ग्रुप ने भी अगस्त के लिए तेल उत्पादन कोटा में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश अपने बढ़े हुए कोटे का पूरा इस्तेमाल कर तेल बाजार में उतार रहे हैं. 

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