भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में हुए संघर्ष में ब्रह्मोस मिसाइल के प्रदर्शन ने चीन समेत दुनिया के सभी देशों को अचंभित कर दिया. ब्रह्मोस मिसाइल ने ही चीनी एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 और पाकिस्तान के एयरबेसों को तबाह किया था, लेकिन अब भारत के दोस्त रूस ने एक ऐसी हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार की है, जिसकी स्पीड मैक 10 यानी 12 हजार किमी प्रति घंटा है. इतना ही नहीं ओरेशनिक मिसाइल किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आएगी. जब से रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इसे अपने बेड़े में शामिल करने का ऐलान किया है, तबसे अमेरिका समेत यूरोपीय देशों में खलबली मची हुई है. 

रूस कहां तैनात करेगा ओरेशनिक मिसाइल?

रूस का दावा है कि ओरेशनिक मिसाइल को इस साल के आखिर तक बेलारूस में तैनात कर दिया जाएगा. बेलारूस, रूस का दोस्त है और उसका बॉर्डर यूक्रेन से एक हजार किमी से ज्यादा लगता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मिसाइल की रेंज 500 से 5500 के बीच हो सकती है, इसलिए इसकी रेंज में पूरा यूरोप आ जाएगा. यही वजह है कि फ्रांस, ब्रिटेन से लेकर अमेरिका तक भी टेंशन में आ गया है. यह भी हो सकता है कि आने वाले में रूस इस मिसाइल की टेक्नोलॉजी अपने सबसे विश्वसनीय दोस्त भारत को भी दे. बस यही सोचकर पाकिस्तान और चीन की भी सांसें अटकी हुई हैं. 

NATO के सभी देश अब रूस की रडार में 

रूस ने जो ओरेशनिक मिसाइल तैयार की है, ये RS-26 रूबेज प्लेटफॉर्म पर आधारित है. इस मिसाइल की स्पीड चौंका देने वाली है. ओरेशनिक मिसाइल MIRV टेक्नोलॉजी से भी लैश है, जो इसके सटीक टारगेट और घातक होने की क्षमता को बढ़ाता है. यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस मिसाइल को कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इंटरसेप्ट ही नहीं कर सकता. इसकी सीमा में पूरा यूरोप आता है. NATO में शामिल अब हर देश रूस की रडार में आ जाएगा.

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की क्या है खासियत? 

दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस को भारत और रूस ने मिलकर ही बनाया है. इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की रफ्तार 2100 से 3400 किमी प्रति घंटा है. पहले इसकी रेंज 290 किमी ही थी, लेकिन बाद में इसकी रेंज को बढ़ाकर 450 किलोमीटर तक कर दिया गया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब भारत ब्रह्मोस का हाइपरसोनिक वर्जन डेवलप कर रहा है, जिसकी रेंज 1500 किलोमीटर या उससे ज्यादा हो सकती है. ब्रह्मोस हाइपरसोनिक की रफ्तार 6000 किमी प्रति घंटे से ज्यादा होगी. ब्रह्मोस की सबसे बड़ी खासियत है कि वो ट्रेडिशनल के साथ-साथ न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है. हालांकि इसे रडार से ट्रैक किया जा सकता है. सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइल में क्या होता है अंतर?

सुपरसोनिक मिसाइल की तकनीक लगभग हर बड़े देश के पास है, लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइल को डेवलप करना अभी दूर की कोड़ी है. जिन मिसाइलों की रफ्तार 5 मैक यानी छह हजार किमी प्रति घंटा या उससे ज्यादा होती है, उन्हें हाइपरसोनिक मिसाइल कहा जाता है. इससे कम स्पीड वाली मिसाइल को सुपरसोनिक मिसाइल कहा जाता है. हाइपरसोनिक मिसाइल किसी रडार की पकड़ से भी बाहर होती है. भारत की अग्नि-5 हाइपरसोनिक इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. इसके अलावा भारत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भी हाइपरसोनिक में कन्वर्ट करने में जुटा है. 

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