बीजेपी नेता राम माधव ने अमेरिका के रुख पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत ने पहले ही कई बड़े फैसले अमेरिकी दबाव में लिए हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका के कहने पर न केवल ईरान से तेल खरीदना बंद किया, बल्कि रूस से तेल आयात पर भी ब्रेक लगाया.

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राम माधव के मुताबिक, इन फैसलों के कारण भारत सरकार को घरेलू स्तर पर विपक्ष की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा. उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारत पहले ही इतने समझौते कर चुका है, तो आखिर अमेरिका और क्या चाहता है.

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, कूटनीति और रणनीतिक संतुलन को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है. हालांकि राम माधव ने बाद में एक्स पर पोस्ट कर माफी मांगते हुए कहा कि उन्होंने जो बयान दिया वो गलत था.

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उन्होंने कहा, 'मैंने जो कहा वह गलत था. भारत ने रूस से तेल का आयात रोकने पर कभी सहमति नहीं दी. साथ ही भारत ने 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने का जोरदार विरोध भी किया था. मैं दूसरे पैनलिस्ट की बात के जवाब में बस एक सीमित-सा तर्क देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तथ्यों के लिहाज से मेरी बात गलत थी. इसके लिए मैं माफी चाहता हूं.'

वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के नेतृत्व में 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक यूएसटीआर ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व वाले अमेरिकी दल के साथ व्यापार समझौते के बारीक पहलुओं पर बातचीत की. तीन दिन चली यह वार्ता बुधवार (22 अप्रैल 2026) को समाप्त हुई. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी होने के बाद कहा कि भारत एक कठिन चुनौती है. 

जैमीसन ग्रीर ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की ‘वेज एंड मीन्स कमेटी’ से कहा, 'भारत एक कठिन चुनौती है. उन्होंने लंबे समय से अपने कृषि बाजारों की रक्षा की है. वे इस समझौते का काफी हिस्सा सुरक्षित रखना चाहते हैं. हालांकि, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां मुझे लगता है कि हम आपसी सहमति बना सकते हैं. डीडीजीएस (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) इसका एक अच्छा उदाहरण है.’

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