झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर बच्चों को पढ़ाने वाली भारतीय शिक्षिका को 10 लाख अमेरिकी डॉलर के जेम्स एजुकेशन ग्लोबल टीचर पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है. अंतरराष्ट्रीय लेवल पर फेमस भारतीय कलाकार और परिवर्तनकारी टीचर रूबल नागी को इस साल 139 देशों से प्राप्त 5,000 से अधिक नामांकनों और आवेदनों में से चुना गया.

ये घोषणा विश्व सरकार शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन की गई. यह पुरस्कार दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने जीईएमएस एजुकेशन के संस्थापक सनी वर्गी और द वर्गी फाउंडेशन के साथ मिलकर दिया है. 

भावुक हुईं रूबल नागीपुरस्कार स्वीकार करने के बाद उन्होंने (रूबल नागी) ने अपने आंसू पोंछे और वो भावुक नजर आईं. आंसुओं के बीच मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, "यह एक सपना सच होने जैसा है. यह पुरस्कार पिछले 24 वर्षों की कड़ी मेहनत का नतीजा है. सुबह उठकर भारत के सुदूरतम क्षेत्रों, झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर बच्चों को पढ़ाना और उनसे सीखना शामिल ही मेरा एक ही लक्ष्य था. बच्चों की शिक्षा बीच में नहीं रुकनी चाहिए. भारत के हर बच्चे को स्कूल में देखना मेरा सपना रहा है." क्या है 'मिसाल इंडिया'रूबल ने खुद से 'मिसाल इंडिया' नाम से एक योजना बनाई, जिसके तहत 100 से अधिक झुग्गी-झोपड़ियों और गांवों में 10 लाख से अधिक बच्चों को कम लागत वाली, कला-आधारित शिक्षा प्रदान की गई. वो बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अंक ज्ञान, जीवन कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण को लेकर भी तमाम जानकारियां देती हैं. उन्होंने 'मिसाल मुंबई' नाम से भी एक योजना बनाई. भारत की पहली झुग्गी-झोपड़ी सुधार पहल के तहत 155,000 से अधिक घरों को रंगने के साथ-साथ स्वच्छता, पेयजल में भी सुधार का काम किया गया और स्वच्छता कार्यशालाओं का आयोजन किया गया.

क्या है ग्लोबल टीचर प्राइज ग्लोबल टीचर प्राइज अपनी तरह का सबसे बड़ा पुरस्कार है और इसकी स्थापना हर साल एक उत्कृष्ट शिक्षक को सम्मानित करने के लिए की गई थी. यह वर्की फाउंडेशन और यूनेस्को के सहयोग से शुरू की गई एक पहल है. इसकी शुरुआत से लेकर अब तक इस पुरस्कार के लिए दुनिया भर से 100,000 से अधिक आवेदन और नामांकन प्राप्त हो चुके हैं.

रूबल ने कहा कि यह पुरस्कार एक बेहतरीन पहल है. उन्होंने कहा, "शिक्षकों का महत्व हमेशा से रहा है और आज तो उनका महत्व सबसे अधिक है, ताकि वे प्रेरित कर सकें, प्रोत्साहित कर सकें और हर बच्चे को स्कूल ले जा सकें ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा दी जा सके."

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