एक महीने से भी ज्यादा वक्त तक ईरान से जंग लड़ने के बाद भी जब ट्रंप उसे जीत नहीं पा रहे हैं, तो उन्होंने अपना निशाना बदल दिया है और अब उनकी सर्जिकल स्ट्राइक के निशाने पर उनके वो अपने लोग आ गए हैं, जिन्होंने इस जंग में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन जंग खत्म न होने की सूरत में खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली हालत में आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बड़े-बड़े सैन्य अधिकारियों से लेकर देश के सबसे बड़े वकील तक का पद छीन लिया है.
ट्रंप ने कुछ को जबरन रिटायर होने का आदेश दे दिया है, तो कुछ की भूमिका बदलकर ये भी साबित करने की कोशिश की है कि ईरान से जंग लड़ने का फैसला, उसकी दशा और उसकी दिशा पेंटागन नहीं, बल्कि वॉशिंगटन तय करेगा.
अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ ने ट्रंप को क्या दी थी सलाह?
28 फरवरी, 2026 के हमले से पहले जब ट्रंप ईरान को जंग की धमकी दे रहे थे, तो उस वक्त भी अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल डैन केन ने ट्रंप को आगाह किया था कि ईरान के खिलाफ सीधी जंग घातक हो सकती है. तब जनरल केन ने ट्रंप को ये भी सलाह दी थी कि ये जंग अमेरिका को लंबे वक्त तक उलझा सकती है, लेकिन तब ट्रंप ने जनरल केन की बात नहीं मानी.
जबकि अब ये साबित हो चुका है कि जनरल केन का अनुमान सही था और अमेरिका एक ऐसी लंबी जंग में उलझ गया है, जहां से निकलना ट्रंप के लिए मुश्किल हो रहा है. तो वो ईरान पर तो हमले कर रहे हैं, धमकियां दे रहे हैं, लेकिन साथ ही अब ट्रंप अपने लोगों पर भी सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे हैं, जिसका पहला निशाना अमेरिकी सेना ही बनी है.
किन-किन अधिकारियों पर चला ट्रंप का चाबुक
फिलहाल जब ट्रंप ईरान में बूट ऑन द ग्राउंड की तैयारी कर रहे हैं, तो उससे पहले उन्होंने आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को तत्काल प्रभाव से रिटायर होने का आदेश जारी कर दिया है. इसके अलावा, ट्रंप चेयरमैन ऑफ जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सीक्यू ब्राउन को भी चलती जंग के बीच उनके पद से हटा चुके हैं.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना के ट्रांसफॉर्मेशन और ट्रेनिंग कमांड के मुखिया जनरल डेविड होंडे और आर्मी के चैपलिन कॉप्स के कमांडर मेजर जनरल विलियम ग्रीन को भी उनके पद से हटा दिया गया है. बाकी तो सेना से इतर ट्रंप ने अपनी सबसे करीबी और वफादार माने जानी वाली अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को भी पद से हटा दिया है. इन सबको अपनी पोजिशन से सिर्फ इसलिए हाथ धोना पड़ा है, क्योंकि इनमें से कोई भी ट्रंप की हां में हां नहीं मिला रहा था और उन्हें ईरान जंग की हकीकत बताने की कोशिश कर रहा था.
सेना के सभी शीर्ष पदों पर भरोसेमंद लोगों को बैठाने की कार्रवाई
जैसे आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज का कार्यकाल अभी एक साल तक बचा थ,. लेकिन उनकी नियुक्ति जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई थी तो अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ उनको ट्रंप के लिए भरोसेमंद नहीं मानते थे. ऐसे वक्त में जब ट्रंप के पास ईरान में सेना भेजने का ऑप्शन मौजूद है, हेगसेथ चाहते थे कि अमेरिकी सेना की कमान उनके विश्वस्त के हाथ में रहे, तो उन्होंने रैंडी जॉर्ज को जबरन रिटायर करवा दिया और उनकी जगह जनरल क्रिस्टोफर लानेवे को कार्यकारी सेना प्रमुख बनाया गया है, जो पीट हेगसेथ के सबसे भरोसेमंद जनरल हैं.
भरोसे का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जनरल क्रिस्टोफर लानेवे अभी दो साल पहले तक टू स्टार जनरल हुआ करते थे, लेकिन अक्टूबर 2025 में ही उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बना दिया गया था.
ईरान संग US की जंग अब सिर्फ राजनीतिक नहीं
अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी और इस जंग में ट्रंप के सबसे भरोसेमंद पीट हेगसेथ ने कभी भी ईरान में सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया है और ईरान में सेना भेजने का मतलब है अमेरिकी सेना पर पीट हेगसेथ का पूरा नियंत्रण हो, जो किसी भी तरह के हमले के लिए हेगसेथ और ट्रंप को इनकार न कर सकें. लिहाजा टॉप पोजीशन पर अपने खास को बिठाना जरूरी हो गया था और भी जो बड़े बदलाव हुए हैं, वो उसी भरोसे के लिए हैं, जिसके जरिए ट्रंप ईरान को संदेश भी देना चाहते हैं कि उनकी सेना लड़ाई की तैयारी कर रही है.
इन बदलावों ने एक चीज और भी तय कर दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में फैसले अब वॉशिंगटन से नहीं, बल्कि पेंटागन से तय हो रहे हैं. यानी कि अमेरिका और ईरान के बीच के जंग का फैसला अब राजनीतिक नहीं रह गया है, बल्कि अब ये सीधे तौर पर अमेरिकी सेना के हाथ में है, जिसके लीडर पीट हेगसेथ हैं.
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