प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में इजरायल पहुंचने वाले हैं, जहां वे भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे और शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे. साल 2017 के बाद यह उनका पहला इजरायल दौरा है और कुल मिलाकर दूसरा दौरा. इस यात्रा को पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका और मजबूत होती कूटनीतिक पकड़ के रूप में देखा जा रहा है.

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पश्चिम एशिया में बढ़ती भारत की साखपिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत देश के रूप में पेश किया है. भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा दी है.

इजरायल के साथ नई ऊंचाई पर साझेदारी

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साल 2017 में पीएम मोदी इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे. उसी दौरे से दोनों देशों के रिश्तों की नई शुरुआत हुई थी. अब भारत-इजरायल साझेदारी अपने अब तक के सबसे बेहतर स्तर पर पहुंच चुकी है.

खाड़ी और अरब देशों से मजबूत संबंध

पीएम मोदी हाल ही में जॉर्डन और ओमान की यात्रा कर चुके हैं. पिछले साल उन्होंने सऊदी अरब का दौरा किया था. जनवरी में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में आयोजित हुई थी. हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति भी भारत दौरे पर आए, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना गया.

निष्पक्ष नीति और दो-राष्ट्र समाधान पर कायम रुख

भारत पश्चिम एशिया में संतुलित और निष्पक्ष भूमिका निभाता है. 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए आतंकी हमले की प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत निंदा की थी. वहीं, भारत इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान के अपने रुख पर कायम है और गाज़ा में मानवीय सहायता भी भेज चुका है.

रणनीतिक साझेदारी और सम्मान

पश्चिम एशिया के कई देशों ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है. कई अहम खाड़ी देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई है. ओमान के साथ व्यापार समझौता भी किया गया है, जो आर्थिक संबंधों को और मजबूती देता है.