Explained: गले नहीं, सिर्फ हाथ मिलाया... PM मोदी और ट्रंप की बेरंग मुलाकात, भारत-अमेरिका के रिश्ते में इसके मायने क्या?
No Hugs Only Handshake: एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी इतनी गहरी है कि एक मुलाकात के टूटने या एक हग के गायब होने से खत्म नहीं हो सकती है.

फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 16 महीने बाद मुलाकात हुई. लेकिन इस बार वह मुलाकात पुरानी यादों की तरह गर्मजोशी भरी नहीं थी. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन सिर्फ हैंडशेक के साथ किया, जिसमें ट्रंप ने मोदी की बांह को हल्के से थपथपाया. यह बदलाव महज एक इशारा नहीं, बल्कि पिछले डेढ़ साल में भारत-अमेरिका संबंधों में आई गहरी तल्खी का आईना है. दो देशों के रिश्तों में सिर्फ हाथ मिलाने के मायने क्या हैं...
क्यों गायब हुआ 'हग' और क्यों आया 'हैंडशेक'?
PM मोदी का गले लगकर अभिवादन करना उनकी पहचान रही है . विदेश मामलों के जानकार और NEHU के प्रोफेसर डॉ. प्रसेनजीत बिस्वास कहते हैं कि मोदी का यह अंदाज दिखाता है कि भरोसा सिर्फ बातों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रिश्तों और पॉजिटिव बॉडी लैंग्वेज से बनता है. 2017 में जब मोदी और ट्रंप पहली बार मिले थे, तो मोदी के गले लगने ने ट्रंप को भी चौंका दिया था. लेकिन इस बार वह गर्मजोशी गायब थी. इसके पीछे 4 बड़े कारण हैं:
- व्यापार और टैरिफ का तनाव: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से व्यापार समझौता अटका हुआ है. ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए. अगस्त 2025 में ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर जुर्माना शुल्क भी लगा दिया. अमेरिका ने भारत समेत कई देशों से आयात पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क भी प्रस्तावित किया. भारत चाहता है कि उसे व्यापार समझौते में वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों पर बढ़त मिले, लेकिन अमेरिका की टैरिफ नीतियों ने भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं.
- H-1B वीजा विवाद: ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन पॉलिसीज ने भारतीय छात्रों और पेशेवरों को बुरी तरह प्रभावित किया है. अमेरिका ने H-1B वीजा शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा. हालांकि एक अमेरिकी अदालत ने 1 लाख डॉलर के नए शुल्क को खारिज कर दिया, लेकिन नीतियों की दिशा ने भारत में चिंता पैदा कर दी.
- पाकिस्तान को लेकर विवाद: ट्रंप ने बार-बार सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई. भारत ने इस दावे को साफतौर पर खारिज करते हुए कहा कि यह मामला दोनों देशों के बीच सीधे सुलझा दिया है.
- सबसे ताजा और गंभीर विवाद: होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका ने भारतीय जहाज पर मिसाइल दाग दी, जिसमें 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई. इस घटना ने रिश्तों में सबसे गहरी दरार पैदा की. अमेरिकी सेना ने ओमान तट पर तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया. इसमें 8 जून को मारिवेक्स, 9 जून को सेट्टेबेलो और 11 जून को MT जलवीर शामिल हैं. भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी चार्ज डी'एफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया. अमेरिकी हमलों को 'अस्वीकार्य' बताया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की आर्थिक इकाई स्वदेशी जागरण मंच ने अमेरिकी राजदूत को पत्र लिखकर नाराजगी जताई.
मोदी का 'विश्वास' वाला बयान और उसके मायने क्या?
मुलाकात से ठीक पहले G7 सत्र में PM मोदी ने ट्रंप के सामने ही बड़ा बयान दिया उन्होंने कहा, 'दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है.' उन्होंने कहा कि साझेदारी का भविष्य इसी भरोसे को फिर से बनाने पर निर्भर करता है. हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में भारतीय नागरिकों की जान गई है. उन्होंने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें. यह बयान ट्रंप को सीधा संदेश था.
'इंडो-पैसिफिक कमांड' से 'इंडो' हटाना: एक और बड़ा संकेत
तनाव को और बढ़ाते हुए अमेरिका ने हाल ही में अपने सबसे बड़े सैन्य कमांड US इंडो-पैसिफिक कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया. दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही इस कमांड का नाम बदलकर 'इंडो-पैसिफिक' रखा गया था, जिसे भारत के बढ़ते महत्व का संकेत माना गया था. लेकिन ट्रंप 2.0 में यह बदलाव अलग संदेश दे रहा है. इसके अलावा, अमेरिका ने इस घोषणा के साथ जो नक्शा इस्तेमाल किया, उसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया. जिसने भारत की भावनाओं को ठेस पहुंचाई.
क्या यह भारत-्रअमेरिका के रिश्तों का अंत है?
पाकिस्तान के पूर्व हाई कमीशन ऑफ इंडिया अजय बिसारिया कहते हैं, 'इस मुलाकात का सबसे बड़ा संदेश हैंडशेक में नहीं, बल्कि इस बात में है कि मुलाकात हुई. दोनों देश समझते हैं कि अलग-अलग रहने की कीमत एक-दूसरे से उलझे रहने की परेशानी से कहीं ज्यादा है. PM मोदी और ट्रंप अच्छे से जानते हैं कि सिर्फ हाथ मिलाना क्या संदेश देता है, लेकिन इसे रिश्तों में दरार की तरह नहीं देखा जा सकता है. 4-5 मुद्दों पर अनबन तो हर देश के साथ होती है.'
यह 'हैंडशेक' रिश्ते में खटास है या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन अभी रिश्ता खत्म नहीं हुआ है. PM मोदी ने ट्रंप के सामने ही भरोसे की कमी और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर साफ संदेश दिया कि भारत अब चुपचाप सब कुछ सहन नहीं करेगा. वहीं, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी इतनी गहरी है कि एक मुलाकात के टूटने या एक हग के गायब होने से खत्म नहीं हो सकती है.





















