Pakistan In Economic Crisis: रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया, यह कहावत पाकिस्तान पर बिल्कुल सटीक बैठती है. ऐसा इसलिए क्योंकि बदहाली के दौर से गुजरने के बावजूद भी पाकिस्तान मदद करने वालों के आगे शर्त रख रहा है. दरअसल, पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने गुरुवार (16 मार्च) को कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से रुके हुए कर्ज को वापस लेने के लिए हम अपने परमाणु कार्यक्रम से कोई समझौता नहीं करेंगे.


गौरतलब है कि पाकिस्तान इन दिनों कंगाली के दौर से गुजर रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम होता जा रहा है. मित्र देशों से लाख गुहार लगाने के बाद भी मदद नहीं मिली है. महंगाई आसमान छू रही है. बुनियादी जरूरतों के लिए लोग तरस रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान के पास आईएमएफ ही एक विकल्प बचा है, जिससे मदद की उम्मीद है. हालांकि अभी तक बात नहीं बन पाई है. 


'समझौता नहीं करेगा पाकिस्तान'


दरअसल, मदद से पहले आईएमएफ ने कई शर्तें लगाई हैं. इनमें से एक परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्त भी है. लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि चाहे कुछ भी हो जाए, परमाणु कार्यक्रमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. बता दें कि पाकिस्तान की सरकार को IMF के 1.1 बिलियन डॉलर के फंड का इंतजार है. 


पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार का यह बयान पाक सीनेटर रज़ा रब्बानी के एक सवाल पर आया है. रब्बानी ने जब पूछा कि क्या सरकार को देश के हितों के खिलाफ कदम उठाने के लिए मजबूर करने के लिए आईएमएफ कार्यक्रम में देरी की जा रही है. पाकिस्तान में गहराते आर्थिक संकट के बीच देश के परमाणु हथियारों के जखीरे को लेकर पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ गई हैं.






पाकिस्तान पर हुक्म चलाने का कोई अधिकार नहीं: डार 


रब्बानी के सवाल के जवाब पर वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा कि मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि पाकिस्तान अपने परमाणु या मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करने जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि किसी को भी पाकिस्तान पर यह 'हुक्म चलाने का कोई अधिकार नहीं है कि उसके पास कितनी रेंज की मिसाइलें और कौन से परमाणु हथियार हो सकते हैं. डार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आईएमएफ के साथ जो भी समझौता होगा, उसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा.


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