पाकिस्तान ने सऊदी अरब में तैनात किए F-16 फाइटर जेट्स, ईरान युद्ध के बीच शहबाज-मुनीर ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
US-Iran War: पाकिस्तानी सेना की ये स्क्वार्डेन ईरान पर जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैनात की गई है, जो ईरान की सीमा से सिर्फ 220 किलोमीटर दूर है.

ईरान और अमेरिका के बीच हुई इस्लामाबाद में हुई वार्ता के बीच शनिवार को सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने ऐलान किया कि पाकिस्तान ने अपने फाइटर जेट्स और अन्य उपकरण सऊदी अरब में रक्षा समझौते के तहत तैनात किए हैं. पाकिस्तान की इस तैनाती में एबीपी न्यूज के हाथ कई एक्सक्लूसिव जानकारियां लगी हैं.
तैनात किए 17 F-16 फाइटर जेट
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने सऊदी अरब के ढाहरान इलाके में पर्शियन गल्फ/अरेबियन गल्फ के पास मौजूद किंग अब्दुल अजीज एयरबेस पर अपनी एयरफोर्स की स्क्वार्डन नंबर 11 के 17 F-16 लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. पाकिस्तानी सेना की ये स्क्वार्डेन अगर सऊदी अरब पर ईरान हमला करता है तो सूत्रों के मुताबिक ईरान पर जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैनात की गई है, जो ईरान की सीमा से सिर्फ 220 किलोमीटर दूर है.
Saab-2000 विमान भी तैनात
इसके अलावा पाकिस्तान ने अपनी सेना के एक Saab-2000 विमान भी अब्दुल अजीज एयरबेस पर तैनात किया है, जो चलता फिरता जंगी जहाज है. इसका काम दुश्मन के मिसाइल हमले को पहुंचने से पहले डिटेक्ट करने और विमान को जाम करने के लिए पाकिस्तान की सेना करती है. साथ ही दुश्मन देश की गतिविधियों की जासूसी करने के लिए भी पाकिस्तानी सेना का Saab-2000 विमान काम आता है, इसीलिए इस विमान को एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWCS) कहा जाता है.
सूत्रों के मुताबिक सऊदी अरब में पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमान और Saab-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWCS) के अलावा इन लड़ाकू विमानों और साब को उड़ाने वाले पायलट के अलावा 20 से ज़्यादा अन्य पाकिस्तानी पायलटों को सऊदी अरब में तैनात किया है, जो ईरान के सऊदी अरब पर हमले की स्थिति में सऊदी अरब के F-15 ईगल लड़ाकू विमानों को उड़ायेंगे.
साथ ही सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने किंग अब्दुल अज़ीज बेस पर एंटी ड्रोन सिस्टम भी लगा दिया है, जो कराची और क्वेटा में तैनात था. ताकि ईरान के ड्रोन हमले की सूरत में उसके सैनिक और विमान बच जाएं. इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने अपनी 25 मैकेनाइज्ड डिवीजन की 2 ब्रिगेड 19 वीं ब्रिगेड और 13 ब्रिगेड को भी सऊदी अरब-यमन बॉर्डर के पास तैनात किया है, जिसमें कुल 13 हजार पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब पहुचें हैं.
हूती विद्रोहियों के खिलाफ इस्तेमाल
सूत्रों के मुताबिक अगर युद्ध फिर से होता है और हूती फिर से सऊदी पर हमला करते हैं तो ये दोनों ब्रिगेड हूती विद्रोहियों के खिलाफ यमन में लड़ेंगी. साथ ही पाकिस्तानी सेना की 25वीं मैकेनाइज्ड डिवीजन को रेगिस्तान में जंग लड़ने के लिए महारत हासिल है. इसकी दोनों ब्रिगेड सऊदी में यमन सीमा के पास तैनात हुई हैं, उनकी हथियारबंद गाड़ियों से लेकर अन्य उपकरण भी रेगिस्तानी इलाके में आराम से जंग लड़ सकते हैं.
पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा था सऊदी
सूत्रों के मुताबिक ईरान के जंग शुरू होने के बाद से सऊदी अरब लगातार पाकिस्तान से रक्षा समझौते के तहत अपनी सेना, फाइटर जेट और अन्य सैन्य मदद तैनात करने का दबाव बना रहा था, लेकिन पाकिस्तान हर बार सिर्फ सऊदी अरब जाकर वादा करके आ जा रहा था. सबसे पहले 6 मार्च को युद्ध के बीच पाकिस्तान का फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सऊदी जाकर सऊदी के रक्षा मंत्री मोहम्मद बिन जायद से मिला और वादा किया कि पाकिस्तान सऊदी की रक्षा के लिये अपनी सैन्य ताकत को तैनात करेगी, लेकिन पाकिस्तान ने ये वादा नहीं निभाया.
इसके बाद सऊदी अरब द्वारा और दबाव बनाने पर 12 मार्च पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर और इशाक डार सऊदी अरब जाते हैं और फिर से सऊदी अरब से वादा करते हैं कि उसकी सेना जल्द ही सऊदी अरब में अपने फाइटर जेट्स और एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात कर देगा और सैनिकों को भी भेज देगा. हालांकि पाकिस्तान इस वादे को भी पूरा नहीं करता है.
पाक ने क्यों लिया फैसला?
इस मामले में टर्निंग पॉइंट संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा पाकिस्तान को दिए गए कर्ज की 3.5 बिलियन डॉलर की किश्त को माना जा रहा है, जिसके बाद पाकिस्तान ने पहले सऊदी से वित्तीय मदद मांगी और फिर गुरुवार 9 अप्रैल से सऊदी अरब में अपनी सेना, फाइटर जेट,एंटी ड्रोन सिस्टम और साब-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWCS) की तैनाती शुरू कर दी तैनाती शुरू होने के बाद सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल जदान इस्लामाबाद जाते हैं और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री डॉ इशाक डार से मुलाकात करते हैं.
Source: IOCL


























