घुटनों पर आए शहबाज-मुनीर! युद्ध में भारी नुकसान के बाद अफगानिस्तान से लगाई गुहार, काबुल भेजा डेलीगेशन
Pakistan-Afghanistan War: पाकिस्तान के भेजे गए प्रतिनिधिमंडल में वैश्विक आतंकी मौलाना फजल-उर-रहमान खलील, जैश का आतंकी कमांडर पीर मजहर सईद शाह और जैश का वित्तीय प्रमुख मौलाना सज्जाद उस्मान शामिल है.

- पाकिस्तान ने काबुल में भेजा 3 सदस्यीय मौलानाओं का प्रतिनिधिमंडल।
- प्रतिनिधिमंडल में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कमांडर भी शामिल।
- अफगान तालिबान को पाकिस्तान ने शांति का प्रस्ताव दिया।
- तालिबान ने पाकिस्तान से दोबारा हमला न करने का वादा मांगा।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान युद्ध के 13 दिन अफगान सेना के हाथों 337 सैनिकों की मौत, 184 सैन्य चौकियां और 7 बड़े सैन्य अड्डे तबाह होने के बाद मंगलवार (10 मार्च, 2026) को पाकिस्तान ने अफगान तालिबान के साथ बैक चैनल वार्ता के लिए अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आतंकी मसूद अजहर के गुरु, आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के संस्थापक और वैश्विक आतंकी मौलाना फजल-उर-रहमान खलील की अगुआई में 3 सदस्यीय मौलानाओं का प्रतिनिधिमंडल भेजा है.
अफगान तालिबान के साथ शांति के लिए बैक चैनल वार्ता में वैश्विक आतंकी मौलाना फजल-उर-रहमान खलील, जो जैश-ए-मोहम्मद के शूरा का सदस्य भी है, के अलावा जैश का आतंकी कमांडर और PoK का विधायक अब्दुल्लाह सईद शाह उर्फ पीर मजहर सईद शाह भी शामिल है. साथ ही प्रतिनिधिमंडल में तीसरा सदस्य आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन का संस्थापक सदस्य और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का वित्तीय प्रमुख मौलाना सज्जाद उस्मान भी शामिल है.
पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने तालिबान सरकार को दिया प्रस्ताव
पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कमांडरों का ये दल अफगानिस्तान में तालिबान के साथ बैक चैनल बातचीत करने के लिए भेजा गया. जानकारी के मुताबिक, काबुल में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के अधिकारियों के साथ मंगलवार (10 मार्च, 2026) को शाम 4 बजे इस तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत भी की और पाकिस्तान की ओर से शांति का प्रस्ताव दिया.
तालिबान सरकार ने युद्धविराम के लिए रखी शर्त
13 दिन से चल रहे युद्ध में पाकिस्तान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और तुर्की से कई बार आधिकारिक रूप से बातचीत करके अफगानिस्तान के साथ संघर्षविराम के लिए मध्यस्थता करने के लिए मदद मांग चुका है, लेकिन इन देशों के मंत्रियों के साथ बातचीत में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार साफ कह चुकी है कि पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम और शांति तब तक नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान लिखित में दोबारा अफगानिस्तान पर हमला ना करने का वादा करेगा.
शांति वार्ता के लिए PAK पहले भी ले चुका है जैश की मदद
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कमांडरों को अफगानिस्तान के साथ शांति वार्ता करने के लिए भेजने का निर्णय पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का ही हो सकता है, क्योंकि इससे पहले भी अफगान तालिबान के साथ शांति के लिए पाकिस्तान जैश के प्रमुख मसूद अजहर की भी मदद ले चुका है.
जैश के इन तीनो कमांडरों ने हरकत-उल-मुजाहिद्दीन और बाद में जैश-ए-मोहम्मद के गठन से पहले सोवियत संघ के खिलाफ अफगान जिहाद में भाग लिया है, ऐसे में ISI और पाकिस्तान सरकार अफगान जिहाद के दौरान इन आतंकियों की ओर से अफगान तालिबान से बनाए गए संबंधों का प्रयोग अफगानिस्तान के साथ सीजफायर के लिए कर रही है.
Source: IOCL




























