इस्लामाबाद: आतंक और सीजफायर के दोहरे हमले वाले पाकिस्तान का बातचीत को लेकर दोहरा रवैया कायम है. ताज़ा बयान में पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आरोप लगाया है कि भारत ने चुनावों के मद्देनजर उनके साथ बातचीत रद्द कर दी. इसके पहले उन्होंने बातचीत रद्द होने के पीछे राफेल का शिगुफा छोड़ा था. लेकिन उन्होंने मुंह से बीएसएफ जवान की निमर्म हत्या और सिलसिलेवार पाकिस्तानी घुसपैठ और आतंकी वारदातों पर एक शब्द नहीं निकला.
भारत सरकार पर चुनाव से डरे होने का आरोप कुरैशी ने भारत सरकार पर चुनाव की वजह से डरे होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इसी की वजह से बातचीत रद्द करने का फैसला किया गया क्योंकि भारत में चुनाव होने वाले हैं और अब भारत सरकार ये फैसला बदलने की स्थिति में नहीं है. आपको बता दें कि आने वाले दिनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों में विधानसभा और 2019 में लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं और पाक विदेश मंत्री ने बातचीत रद्द किए जाने को इसी से जोड़ने की कोशिश की है.
भाषणबाजी का शिकार होने का आरोप पाक विदेश मंत्री ने आगे कहा कि उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को क्षेत्रीय सहयोग के बारे में बोलते हुए सुना. लेकिन उनका सवाल ये है कि जब हम बातचीत ही नहीं करेंगे तब क्षेत्रीय सहयोग को आगे कैसे बढ़ाएंगे? उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ संबंध आगे बढ़ाना चाहता है. कुरैशी ने ये भी कहा कि पू्रव के दोस्त भाषणबजी का शिकार हो गए हैं.
भारत के 'हृयद परिवर्तन' पर अमेरिका से गुहार कुरैशी ने सवालिया लहजे में पूछा कि पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर बातचीत की पेशकश की जिसके लिए भारत तैयार हुआ, लेकिन 24 घंटे में ऐसा क्या हुआ जिससे भारत का 'हृयद परिवर्तन' हो गया. उन्होंने अमेरिका तक को नसीहत दे डाली कि अमेरिका को भारत को ये बताने की जरूरत है कि उस बातचीत करनी चाहिए.
सुषमा स्वराज का उपहास कर खोली पाक की पोल ऐसी बड़ी बातें करते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने तब खुद ही अपना खुलासा कर दिया जब उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का उपहास करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय विदेश मंत्री की हालत ठीक नहीं लगी. उन्होंने आगे कहा कि सुषमा की हालत ऐसी थी कि वो मीडिया से इस बारे में बात भी नहीं कर पाईं. वहीं, उन्होंने दक्षिण एशिया नीति को असफल बताते हुए इसका आंकलन किए जाने की भी बात कही. ये सारी बातें उन्होंने सार्क के संदर्भ में कहीं.
क्या है कुरैशी के कहे का सार? पाक विदेश मंत्री ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में एशिया सोसायटी के एक कार्यक्रम के दौरान भारत से जुड़े दो सवालों के जवाब में ये बातें कहीं. उन्होंने सुषमा स्वराज के उस एक्शन का जिक्र किया जिसमें वो बिना पाकिस्तानी विदेश मंत्री को सुने सार्क सम्मेलन के एक कार्यक्रम से निकल गईं थीं. इसके लेकर कुरैशी का मानना है कि सुषमा के ऊपर भारी दबाव था जिसे वो झेल नहीं पाईं. कुरैशी के मुताबिक इन तमाम बातों का सार यही है कि भारत सरकार ने चुनावों के मद्देनजर पाकिस्तान को लेकर जो फैसला लिया है वो तार्किक नहीं है और पाकिस्तान का पूरा जोर बातचीत पर है.
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