'हमें जयशंकर से सीजफायर के लिए कहना पड़ा, जब नूरखान-शोरकोट एयरबेस...', ऑपरेशन सिंदूर पर PAK विदेश मंत्री का बड़ा कबूलनामा
इशाक डार ने कहा कि आतंकी ठिकानों की तबाही के बाद सऊदी से फोन आया कि अगर पाकिस्तान रुकने के लिए तैयार है तो वह भारत से बात करेंगे.

भारत के बाद अब पाकिस्तान ने भी दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में अमेरिका की भूमिका को नकारा है. साथ ही यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की रिक्वेस्ट पर सऊदी अरब ने भारत से सीजफायर के लिए बात की. पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने पाकिस्तानी समाचार चैनल में दिए एक इंटरव्यू के दौरान ऐसा दावा किया.
इशाक डार ने इंटरव्यू ने यह भी माना कि भारत ने पाकिस्तान के दो बड़े एयरबेस, नूर खान और शोरकोट, पर हमला किया था. उन्होंने खुलासा किया कि 6-7 मई की दरमियानी रात जब पाकिस्तान जवाबी हमले की तैयारी कर रहा था, तभी भारत ने दोबारा एयर स्ट्राइक की और नूर खान-शोरकोट एयरबेस को नुकसान पहुंचाया.
इशाक डार ने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने की भूमिका में सऊदी अरब की पहल की बात स्वीकारी. उन्होंने बताया कि भारत के हमलों के बाद सऊदी अरब के प्रिंस ने भारत से फोन पर बात करने का प्रस्ताव दिया था. फिर पाकिस्तान की हामी के बाद सऊदी अरब ने भारत से बात की थी.
इशाक डार ने बताया, 'भारतीय हमलों के करीब 45 मिनट बाद सऊदी अरब के प्रिंस फैसल ने मुझसे फोन पर बात की. प्रिंस ने कहा कि क्या मैं भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात करूं? अगर पाकिस्तान रुकने के लिए तैयार है तो भारत भी रुक सकता है. इस पर मैंने उन्हें हां कह दिया. फिर प्रिंस का कुछ देर बाद दोबारा कॉल आया और बताया कि जयशंकर को सारी बातें बता दी हैं.' इशाक डार के इस दावे से अब यह साफ हो गया कि सऊदी अरब ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते आक्रोश को शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और पाकिस्तान में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला करके 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया था. इसके बाद पाक के नाकाम हमलों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया. बाद में पाकिस्तान के अनुरोध पर सीजफायर हुआ, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार अंतर्राष्ट्रीय मंचों से दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने का दावा करते नजर आए, जबकि भारत इसको लगातार नकारता रहा.
अब यह पहला मौका है, जब पाकिस्तान ने भी दोनों पड़ोसी देशों के बीच अमेरिका की मध्यस्थता की भूमिका को नकारा और साफ किया कि सऊदी अरब दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए आगे आया था.
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