Nobel Peace Prize 2025: कौन है वेनेजुएला की 'आयरन लेडी' मारिया कोरीना माचाडो, जिन्हें मिला शांति का नोबेल, जानें एक इंजीनियर ने कैसे रचा इतिहास
मारिया कोरीना माचाडो ने वेनेजुएला में लोकतंत्र और स्वतंत्रता के संघर्ष का नेतृत्व किया है. जानिए कैसे उन्होंने अधिनायकवाद के विरुद्ध साहसिक भूमिका निभाई और नोबेल शांति पुरस्कार हासिल किया.

वर्ष 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2025) घोषित हो गया है. इस बार यह प्रतिष्ठित सम्मान वेनेज़ुएला की मारिया कोरीना माचाडो (María Corina Machado) को दिया गया है. उन्हें यह पुरस्कार शांति स्थापना, लोकतंत्र की रक्षा और वैश्विक संघर्षों को कम करने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया है. नोबेल समिति ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो (Oslo) में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस साल के विजेता की घोषणा की. इस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल पुरस्कार जीतने का सपना अधूरा रह गया.
नोबेल प्राइज की वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक मारिया कोरीना माचाडो ने वेनेजुएला में लगातार बढ़ते सत्ता के दबाव के विरुद्ध लोकतंत्र के संघर्ष का नेतृत्व किया है. 1992 में उन्होंने एटेनिया फाउंडेशन की स्थापना की, जो कराकास में बेघर बच्चों के कल्याण के लिए काम करता है.
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— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 10, 2025
The Norwegian Nobel Committee has decided to award the 2025 #NobelPeacePrize to Maria Corina Machado for her tireless work promoting democratic rights for the people of Venezuela and for her struggle to achieve a just and peaceful transition from dictatorship to… pic.twitter.com/Zgth8KNJk9
मारिया कोरीना मचाडो की पढ़ाई
मारिया कोरीना मचाडो वेनेज़ुएला की एक इंजीनियर, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध राजनेता हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग और फाइनेंस की पढ़ाई की और अपने करियर की शुरुआत व्यापार जगत से की थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने समाजसेवा और राजनीति का रास्ता चुना ताकि वे अपने देश के लोगों के जीवन में बदलाव ला सकें.
लोकसेवा की शुरुआत और एटेनिया फाउंडेशन
मारिया कोरीना मचाडो ने 1992 में एटेनिया फाउंडेशन (Atenea Foundation) की स्थापना की. यह संस्था कराकास शहर में बेघर और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और कल्याण के लिए काम करती है. इस फाउंडेशन के जरिए माचाडो ने सामाजिक सुधार की दिशा में अपनी पहचान बनाई.
सुमाते संगठन और लोकतंत्र की लड़ाई
उन्होंने 2002 में सुमाते (Súmate) नाम के संगठन की सह-स्थापना की, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए काम करता है. यह संगठन मतदाताओं को प्रशिक्षित करता है और चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करता है. उनकी लोकप्रियता तब बढ़ी जब 2010 में वे रिकॉर्ड मतों से वेनेज़ुएला की नेशनल असेंबली की सदस्य चुनी गईं, लेकिन 2014 में लोकतंत्र और स्वतंत्रता की आवाज उठाने के कारण सरकार ने उन्हें उनके पद से हटा दिया. इस कदम ने मचाडो को देश और दुनिया भर में लोकतंत्र की प्रतीक बना दिया.
वेंटे वेनेज़ुएला और विपक्ष की एकता
मारिया कोरीना माचाडो वेंटे वेनेज़ुएला (Vente Venezuela) नामक विपक्षी दल की प्रमुख नेता हैं. 2017 में उन्होंने सोय वेनेज़ुएला (Soy Venezuela) नामक गठबंधन की स्थापना में मदद की, जिसका उद्देश्य था लोकतंत्र समर्थक सभी समूहों को एकजुट करना और राजनीतिक परिवर्तन की दिशा में काम करना.
2024 के चुनाव और माचाडो की उम्मीदवारी
2023 में उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की, लेकिन सरकार ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया. इसके बावजूद उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज उरुतिया का समर्थन किया, जो जनता के बीच एकजुटता और परिवर्तन का प्रतीक बन गए.
लोकतंत्र की लड़ाई और शांतिपूर्ण आंदोलन
वेनेज़ुएला की सरकार ने जब अपनी जीत का दावा किया तब मचाडो और विपक्षी दलों ने व्यवस्थित दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि वास्तविक विजेता विपक्ष ही था. उन्होंने अपनी लड़ाई को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे साहस और संयम का उदाहरण बताया.
नोबेल समिति की तरफ से सम्मान
नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा कि मारिया कोरीना माचाडो ने दिखाया कि लोकतंत्र केवल वोट डालने का अधिकार नहीं, बल्कि यह स्वतंत्रता और सत्य की रक्षा का निरंतर संकल्प है. समिति ने माना कि मचाडो ने वेनेज़ुएला में अहिंसक आंदोलन और संवाद की संस्कृति को आगे बढ़ाया है. उनकी प्रतिबद्धता ने लैटिन अमेरिका में लोकतंत्र के लिए नई उम्मीद की किरण जगाई.
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Source: IOCL






















